जलालाबाद। कथा व्यास अवनीश आहूजा ने कार्तिक महात्म्य की कथा में कार्तिक मास में सुबह के स्नान करने और एकादशी व्रत के महत्ता बताई।
पंजाबी सत्संग भवन में चल रही कार्तिक महात्म्य कथा में कथा व्यास ने बताया कि कार्तिक मास में नित्य ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से यज्ञ करने के समान फल की प्राप्ति होती है। विष्णु भगवान कहते हैं, हे देवताओं आज एकादशी के दिन आप सब ने मुझे जगाया है, इसलिए सब तिथियों में एकादशी की मान्यता अत्यधिक होगी। उन्होंने मत्स्य अवगत की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान मत्स्य (मछली) का रूप धारण करके विंध्याचल में निवास कर रहे महर्षि कश्यप की अंजली में आ गए।
कश्यप जी ने मत्स्य को कमंडल में डाल लिया। कमंडल भर जाने पर मत्स्य को कश्यप जी ने कुएं में छोड़ा। जहां मत्स्य का आकार बढ़ने पर उसे फिर समुद्र में छोड़ दिया गया। तभी भगवान ने एक विशाल मछली का रूप धारण करके दैत्य राज शंखासुर को मार दिया। शंखासुर को मारने के बाद भगवान मत्स्य रूप त्याग कर विश्राम हेतु बद्रीनारायण चले गए।