शामली। टीमें आती हैं, जांच करती हैं और अपनी अलग ही थ्योरी पेश करती हैं। इसके बीच छला जा रहा है तो बस कैराना। हर दल अलग ही निष्कर्ष बताता है। कोई यह नहीं सोचता कि कैराना का असली दर्द क्या है।
बता दें कि पांच दिन के भीतर तीन टीमें कैराना का दौरा कर चुकी हैं। 15 जून को भाजपा सांसदों का दल कैराना आया था। उन्होंने व्यापारी विनोद सिंघल, शिवकुमार और राजेंद्र के परिजनों के साथ ही रेशमी कटहरा धर्मशाला तथा देवी मंदिर में लोगों की मीटिंग करने के बाद कहा कि कैराना के हालात बहुत खराब हैं।
रंगदारी की धमकियों और लूटपाट के कारण लोग यहां से पलायन करने को मजबूर हैं। वहीं, 16 जून को जदयू, माकपा, भाकपा और आरजेडी के नेता कैराना पहुंचे, तो उन्होंने अलग ही कहानी बताई। कहा कि कैराना में कानून व्यवस्था खराब है, जिस कारण लोग पलायन करने को मजबूर हैं।
इसके बाद 19 जून को प्रदेश सरकार की तरफ से गठित संतों के दल ने कैराना पहुंचकर पांच स्थानों पर पहुंचकर पलायन प्रकरण का सच जानने की खातिर
जांच की। संतों के दल ने स्पष्ट कहा कि स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था खराब है, मगर धार्मिक आधार पर पलायन नहीं है। उनका यह भी कहना था कि पलायन के नाम पर गहरी साजिश रची जा रही है।
सोचने की बात यह है कि राजनीतिक दलों के लोग उन्हीं स्थानों पर पहुंचकर जांच करते हैं और अलग अलग राय प्रकट करते हैं। वास्तव में कैराना की क्या समस्या है, उसे जानने से ज्यादा राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश की जाती है। अब चौथी टीम के रूप में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की चार सदस्यीय टीम जांच करने कैराना पहुंची। अब देखना यह है कि मानवाधिकार आयोग की टीम का निष्कर्ष क्या निकलता है।
अपराधियों के खिलाफ हो कार्रवाई
शामली। सोमवार को शहर की कांबोज कालोनी में आर्यजनों की बैठक हुई। जिसमें कैराना पलायन प्रकरण को लेकर विस्तार से गंभीरता के साथ विचार विमर्श किया गया। कैराना पलायन प्रकरण में असमाजिक तत्वो की आलोचना करते हुए केंद्र- प्रदेश सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आर्यजनों ने कैराना मे आतंक फैलाकर पलायन करने वालो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आर्यसमाज बागपत के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रबंधक रामपाल सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रधान बीरबल आर्य, ज्ञानेद्र आर्य, हरपाल सिंह आर्य, धर्मेंद्र मलिक, लक्ष्मीचंद आर्य, रामपाल आर्य, अकुंश मलिक, यशपाल आर्य आदि मौजूद रहे।