शामली। विधानसभा चुनाव में जीत का स्वाद बेशक नहीं मिला, मगर कुछ प्रत्याशियों ने अपने गांव में किसी दूसरे के पैर नहीं जमने दिए। शामली सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े मनीष चौहान और रालोद प्रत्याशी बिजेंद्र मलिक हों, या फिर कैराना सीट से भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह। इन प्रत्याशियों के गांवों में कोई दूसरा प्रत्याशी वोट लेने के लिए तरसता रहा।
शामली विधानसभा सीट पर सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। उन्हें 31824 वोट मिले, जो किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी के लिए बड़ी बात है। मनीष चौहान चुनाव बेशक हार गए, मगर इन वोटों ने दर्शा दिया कि तमाम विरोध और लहर के बावजूद शामली और कांधला क्षेत्र में इतने वोटर उनके पक्के हैं।
वहीं, असर वाले गांवों की बात करें, तो जसाला गांव में मनीष चौहान को 3498, खंदरावली में 1576, पंजोखरा में 949 और रसूलपुर गुजरान में 890 वोट मिले। इन गांवों में भाजपा, सपा-कांग्रेस और रालोद प्रत्याशी भी मनीष चौहान से पीछे रहे।
इसी सीट के जाट बाहुल्य गांवों में रालोद प्रत्याशी बिजेंद्र मलिक ने खूब बढ़त बनाई। उन्हें अपने गांव किवाना में 1631, लिसाढ़ में 2891, लांक में 2504 वोट मिले। यह सभी गांव जाट बाहुल्य हैं और रालोद के परंपरागत वोटरों ने पूरे उत्साह के साथ मतदान किया था। इन गांवों में दूसरे प्रत्याशी वोटों के लिए बिजेंद्र मलिक से पीछे ही रहे। वहीं, कैराना सीट पर भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को उनके गांव कंडेला में 2059, जगनपुर में 556, डूंडूखेड़ा में 1616, इस्सोपुर में 764, तितरवाड़ा में 2324, वेदखेड़ी में 910 वोट प्राप्त हुए। इन गांवों में मृगांका सिंह को बढ़त मिली।