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जागा प्रशासन, खादर में ताबड़तोड़ छापामारी

Sat, 02 Apr 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
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Illegal mining - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना/शामली। यमुना खादर में एनजीटी का आदेश ताक पर रखकर किए जा रहे रेत खनन के खिलाफ अमर उजाला में खबर छपते ही शुक्रवार को प्रशासन में हड़कंप मच गया। उच्चाधिकारियों के आदेश पर कैराना और झिंझाना के यमुना खादर क्षेत्र में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने ताबड़तोड़ छापामारी की। एक स्थान पर खनन माफिया ट्रैक्टर ट्रॉलियों में लदा रेत छोड़कर फरार हो गए। 
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अवैध रेत खनन की शिकायतें पुलिस प्रशासन तक भी पहुंच रही थीं, लेकिन खाकी से दोस्ती के कारण खनन माफिया पर कार्रवाई नहीं हो रही थी। यमुना खादर क्षेत्र में काफी समय से जेसीबी और पोर्कलेन मशीनें लगाकर रेत खनन कराया जाता है। नदी का प्राकृतिक सौंदर्य बिगड़ चुका है।

अवैध खनन से पर्यावरण को भी खतरा बन गया है। अमर उजाला अवैध खनन के खिलाफ अभियान चला रहा है। इसका असर यह हुआ कि शुक्रवार दोपहर एसडीएम कैराना इंद्रसेन यादव, तसीलदार अभयराज पांडेय और कोतवाली प्रभारी एमएस गिल ने पुलिस बल के साथ खनन माफिया की तलाश में खादर क्षेत्र में अभियान चलाया। 
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गांव मंडावर, बसेड़ा, नंगलाराई, मोहम्मदपुर राई, सहपत, डुंडूखेड़ी आदि गांवों में छापामारी की गई। अधिकारी यमुना के बीच रेत खनन के स्थान पर भी पहुंचे, वहां वाहनों के टायरों के निशान मिलें। 

वहीं, गांव मोहम्मदपुर राई में यमुना बांध पर कई खनन माफिया छापामारी की सूचना के चलते ट्रैक्टर ट्रॉलियों से रेत को सड़क किनारे
खाली कर हरियाणा की तरफ फरार हो गए। पुलिस टीम ने खनन करने वालों को पकड़ने के लिए पीछा भी किया, लेकिन वह हाथ नहीं आए। एसडीएम इंद्रसेन यादव ने बताया कि अभियान लगातार जारी रहेगा।

आखिर कौन करता है सूचना लीक 
जब भी पुलिस-प्रशासन खनन माफिया के खिलाफ चेकिंग करने निकलता है तो यह सूचना पहले ही खनन माफिया तक पहुंच जाती है। जिससे माफिया अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही मौके से गायब हो जाते हैं। इससे यह तो साफ है कि कोई न कोई पुलिस या प्रशासन का कर्मचारी माफिया तक यह सारी सूचनाएं पहुंचाता है, नहीं तो अब तक माफिया कभी के पकडे़ जा चुके होते। 

शहर से रोजाना गुजरते हैं सैकड़ों वाहन 
यमुना खादर से अवैध रेत खनन का खेल कितना  बड़ा है, उसका नजारा शामली शहर में भी देखने को मिलता है। रात में झिंझाना और कैराना की तरफ से रेत से भरे वाहन शहर की तरफ आते हैं, जो शामली के बीच से गुजरकर मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और मेरठ की तरफ जाते हैं। खास बात यह भी है कि  ट्रकों और डंपरों में लदे रेत को तिरपाल से ढक कर लाया जाता है। इसकी जानकारी पुलिस को भी           होती है, लेकिन रुपयों के खेल में उन्हें शहर से गुजार दिया जाता है।

चेकिंग होती है दिन में
अवैध रेत खनन पर रोक लगाने को लेकर पुलिस प्रशासन की मंशा साफ नहीं है। अधिकारी जानते हैं कि यमुना  में रेत खनन दिन ढलने के बाद होता है और सुबह दिन निकलने तक खादर में यमुना का सीना चीरा जाता है, लेकिन इसके बावजूद छापामारी अभियान दिन में चलाया जाता है। कैराना और झिंझाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अंधेरे में ही रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली, ट्रक और डंपर निकलते हैं। अगर अधिकारियों को खनन पर रोक लगानी है तो रात में दल बल के साथ निकलना होगा।
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