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मोमबत्तियां जलाने का नहीं, कठोर कानून बनाने का समय

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शामली सेन्टआरसी कान्वेंट स्कूल में अमर उजाला के अपराजिता अभियान के दोरान हैदराबाद की घटना का वि? - फोटो : SHAMLI
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शामली। हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया के साथ हुई हैवानियत के खिलाफ कर कोई आक्रोशित है। महिलाओं में तो इसे लेकर जबर्दस्त गुस्सा है।
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चौतरफा इस घिनौनी वारदात करने वालों को सरेआम फांसी की मांग उठ रही है। युवतियां सवाल उठा रही हैं कि एक तरफ तो बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ के नारे लग रहे हैं। दूसरी तरफ बेटियों के साथ ये सब हो रहा है। बुधवार को सेंट आरसी कान्वेंट स्कूल में छात्राओं और शिक्षिकाओं ने कहा कि अब मोमबत्तियां जलाने की बजाय ऐसे दरिंदों के लिए ऐसी कठोर सजा देने का वक्त आ गया है। ऐसी सजा दिलाई जाए कि उसे सुनकर भी हैवानों की रूह कांपने लगे और फिर कोई दुराचार तो दूर बेटी की तरफ गलत नजरों से देखने की भी हिम्मत ना कर सके।
लड़कों पर भी रोक टोक जरूरी
एक तरफ तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया जा रहा है, दूसरी तरफ बेटियों के साथ ये सब हो रहा है। हर बात में बेटी को रोका टोका जाता है ,बेटों को नहीं। हैदराबाद में जिन्होंने भी वारदात को अंजाम दिया है उन्हें तो बीच चौराहे फांसी देे देनी चाहिए। - देवश्री, छात्रा
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आरोपी को फांसी, परिवार को समाज निकाला
माहौल ऐसा हो गया है कि लोग बेटी को जन्म देने से पहले ये सोचते हैं कि कहीं बड़ी होकर उसकी इज्जत पर कोई आंच ना आ जाए। अब वक्त आ गया है जब समाज को ऐसे हैवानों को सरेआम फांसी और उसके पूरे परिवार को समाज से ही बाहर कर देना चाहिए और उनका साथ देने वालों को भी समाज को नाता तोड़ देना चाहिए। - श्वेता तोमर
बालिग, नाबालिग सबकी सजा एक हो
जब हैवानियत से भरे दरिंदे ऐसे घिनौने अपराध करने से किसी की उम्र नहीं देखते तो फिर कानून ही उनकी उम्र क्यों देखता है। सजा देने में उनसे नरमी क्यों। ऐसे हैवानियत भरी वारदात करने वाला चाहे बालिग हो या नाबालिग सबको एक जैसी सजा हो। - रितिका गोयल
सख्त कानून की जरूरत
बेटी के साथ ये सब आखिर कब तक होगा। अब रोज रोज कैंडल मार्च निकालने की बजाय इन दरिंदों के लिए ऐसी सजा तलाशनी चाहिए, जिससे कोई मां बेटी की तरफ गलत नजर से देखने से पहले भी सो बार सोचे। सख्त कानून की जरूरत है। - अक्षी
हाथ पैर काटकर फांसी दो
सीता का अपहरण करने वाले को आज तक जलाया जाता है। महाभारत में द्रोपदी का अपमान करने वाले का परिवार समाप्त कर दिया गया था। ऐसा था हमारा देश आज बेटियों के साथ ये सब हो रहा है और हम कैंडल मार्च निकालकर चुप बैठ जाते हैं। ऐसे लोगों के तो हाथ पैर काटकर सरेआम फांसी देनी चाहिए। - अंजू मलिक, शिक्षिका
अरब देशों के जैसे कानून की जरूरत
अब कैंडल मार्च निकालने का नहीं बल्कि अरब देेशों के कानून लागू करने का वक्त आ गया। आरोपी को उसके किए की तुरंत सजा मिलनी चाहिए। अरब देश में चोरी लूट करने पर उसके तुरंत हाथ काट दिए जाते हैं। हमारे देश में भी ऐसे ही सख्त कानून की जरूरत है। - अंजू पंवार, शिक्षिका
जल्द सजा से ही कम होंगी ये घटनाएं
इस तरह की घटनाओं में जब जल्द से जल्द सजा नहीं होगी ये घटनाएं रुकने वाली नहीं। ऐसा घिनौना अपराध करने वाले को तो जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए और सजा भी ऐसी कि सुनने वाले की भी रूह कांप जाए। ऐसे हैवानों के लिए तो फांसी भी कम है। गीता शर्मा
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एक महीने में हो निर्णय
बेटियों को इस तरह हैवानियत का शिकार बनाया जा रहा है जो बेहद शर्मनाक है। ये घटनाएं बार बार हो रही हैं इसी से पता चलता है कि अपराधियों में कोई खौफ नहीं है। दिल्ली में कई साल पहले हुई घटना के आरोपियों को आज तक सजा नहीं हुई। सरकार को ऐसे अपराधों में एक महीने के अंदर निर्णय हो जाए इसके लिए स्पेशल कोर्ट बनानी चाहिए। - भावना शर्मा

शामली सेन्टआरसी कान्वेंट स्कूल में अमर उजाला के अपराजिता अभियान के दोरान हैदराबाद की घटना का वि?- फोटो : SHAMLI

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