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अजित सिंह का जिले से रहा अटूट रिश्ता

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अजित सिंह का जिले से रहा अटूट रिश्ता
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शामली। पूर्व प्रधानमंत्री एवं किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की राजनैतिक विरासत संभालने वाले छोटे चौधरी के नाम से प्रसिद्ध चौधरी अजित सिंह का जिले से अच्छा खासा नाता रहा। केंद्रीय मंत्री होते हुए जिले में ऊन, बागपत में मलकपुर चीनी मिल स्थापित कराई। गन्ने का मुद्दा अथवा किसान आंदोलन या पुलिस उत्पीड़न, वर्ष 2008 में पूर्व विधायक पंकज मलिक अथवा महेंद्र सिंह टिकैत की गिरफ्तारी का प्रकरण हो, हरेक मुद्दे पर किसानों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर संघर्ष का रास्ता अपना। सड़क से लेकर संसद तक किसान राजनीति के अग्रदूत बने रहे।
रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह किसान राजनीति के जनक कह जाते थे। बडे़ चौधरी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की राजनीति विरासत संभालने के बाद बागपत-शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर में सक्रिय रहे।
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केंद्रीय उद्योग मंत्री, खाद्य मंत्री रहे चौधरी अजित सिंह ने अपने राजनीति जीवन में कांग्रेस, भाजपा, सपा से दोस्ती निभाई। गठबंधन की राजनीति को बढ़ावा दिया। वर्ष 1989 से लेकर 2021 तक जिले में उनका गहरा रिश्ता रहा है। दिग्गज नेता पूर्व सांसद हुकुम सिंह हो अथवा खादी ग्रामोद्योग के पूर्व चेयरमैन डॉ. यशवीर सिंह, पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह, अनुराधा चौधरी, पूर्व सांसद अमीर आलम, हरेंद्र मलिक, मुनव्वर हसन, पूर्व सांसद हरपाल सिंह जैसे दिग्गज नेता राजनीति पाठशाला में पढ़कर आगे बढ़े। पूर्व सांसद अमीर आलम खां मौजूद दौर में रालोद में, पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह, अनुराधा और हरपाल सिंह पंवार भाजपा में है।
पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक अब कांग्रेस में हैं। पूर्व सांसद हरपाल पंवार बताते हैं कि चौधरी चरण सिंह परिवार से जुड़ाव सन 1983 से था, जब में चौधरी चरण सिंह के सानिध्य में काम करता था और अखिल भारतीय किसान कामगार सम्मेलन का राष्ट्रीय महामंत्री होने के नाते लगातार चौधरी अजित सिंह के संपर्क में रहा।
चौधरी चरण सिंह के बीमार पड़ने के बाद छोटे चौधरी ने पार्टी की जिम्मेदारी संभाली और चौधरी चरण सिंह के सिपाही, अजित सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। उन्हीं के आशीर्वाद से 1989 और 1991 में कैराना से लोकसभा सांसद बनने का मौका मिला। देश के कद्दावर नेता चौधरी अजित सिंह सार्वजनिक जीवन में हमेशा जनता और जमीन से जुड़े रहे। किसानों व मजदूरों के हितों के लिए संघर्ष भी करते रहे। किसानों के लिए उनका संघर्ष व खेतिहर के लिए विशेष योगदान देश सदैव याद रखेगा।
कभी सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं किया
शामली। उत्तर प्रदेश योजना आयोग के पूर्व सदस्य सपा के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर सुधीर पंवार बताते हैं कि छोटे चौधरी ने देशभर से सैकड़ों नवयुवकों को उन्होंने किसान राजनीति में प्रशिक्षित किया। चौधरी साहब से पहचान 1989 में हुई, जब मेरठ विश्वविद्यालय के छात्र उनसे सिविल सेवा परीक्षा की आयु सीमा बढ़ाने की मांग करने गए थे। जिससे आईएएस, आईपीएस जैसी सेवाओं में ग्रामीण युवा अधिक संख्या में आ सके, उन्होंने उसी समय तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह से बात कर हम लोगों की मांग को मनवाया। चौधरी साहब के 35 वर्षों के सफल राजनीतिक जीवन में कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं किया।
किला परिवार का आज भी अटूट रिश्ता है बरकार
जलालाबाद। कस्बे के किला परिवार से छोटे चौधरी का हमेशा संबद्ध रहा है।
पूर्व सांसद गय्यूर अली खां का किला परिवार का चौधरी अजित सिंह के परिवार का पुश्तैनी पारिवारिक संबंध हमेशा से रहा है। भारतीय क्रांति दल हो अथवा राष्ट्रीय लोकदल या कोई भी अन्य दल बनाया हो उसमें गयूर अली खां को अपने साथ रखा। बिना सलाह के आगे नहीं बढे़। चौधरी चरण सिंह ने गय्यूर अली खां को सांसद, राज्यसभा, विधायक व अन्य पदों पर प्रतिष्ठित किया। स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के बाद छोटे चौधरी अजित सिंह का भी वही रिश्ता जलालाबाद के इस खान परिवार से ज्यों का त्यों रहा है। दोनों परिवारों ने किसान मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ते रहे।
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इस परिवार ने हमेशा चौधरी अजित सिंह के परिवार के साथ कैराना लोकसभा, थानाभवन विधानसभा, या अन्य विधानसभा में उतारे गए प्रत्याशियों के जिताने में भी इस परिवार का सहयोग रहा है। नगर पंचायत चेयरमैन रहे शौकत अली खान भी हमेशा चौधरी अजीत सिंह परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। कस्बे में माता गायत्री देवी, बहन सरोज देवी का भी परिवार जनों का घर में आना जाना लगा रहा है। अब तीसरी पीढ़ी में कस्बे के युवा नेता चेयरमैन अशरफ अली खा अपने बड़ों के रास्तों पर चल रहे है। किसान आंदोलन हो या अन्य जनता रैली मैं अशरफ अली जयंत सिंह के साथ जुड़े हैं। आज उनके निधन पर अशरफ अली खान का परिवार भी गहरे सदमे में है।
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