पति की मौत के बाद परिवार में नहीं बचा कोई कमाने वाला
शामली, जलालाबाद। गैस गोदाम से उपभोक्ताओं के घरों तक सिलिंडर पहुंचाने वाले संजय नायक को कोरोना ने लील लिया। परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं है। वृद्ध पिता के अलावा तीन बच्चों के इस परिवार की जिम्मेदारी अब संजय की पत्नी पर है। वह इस चिंता में डूबी रहती है कि परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा।
जलालाबाद के मोहल्ला कटहरा चौक निवासी संजय नायक (45) कोरोना योद्धा की तरह कस्बा जलालाबाद इंडियन गैस गोदाम से अपनी साइकिल से सिलिंडर लेकर उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचाते थे। इससे उन्हें जो भी आमदनी होती थी उससे वह अपने वृद्ध पिता भंवर सिंह (70) तथा अपने तीन बच्चों अंशुल, कार्तिक, गौरव, व पत्नी का जीवनयापन कर रहे थे। संजय नायक मजबूत कद-काठी के व्यक्ति थे, लेकिन अचानक 28 अप्रैल को उन्हें बुखार आया। परिजनों ने कस्बे के अस्पताल में भर्ती कराया। यहां से उसे मुजफ्फरनगर रेफर कर दिया गया। जहां पर रात्रि में ही उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों ने बताया कि संजय कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। रात्रि में ही संजय के शव को अस्पताल से सीधे श्मशान घाट पर लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। संजय की पत्नी बबली पर परिवार का बोझ आ पड़ा है। परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं है। बच्चे छोटे हैं। संजय के बुजुर्ग पिता भंवर सिंह का कहना है कि कई बार वृद्धावस्था पेंशन का फार्म भरने के बावजूद उनकी पेंशन नहीं बन पाई है। परिवार में आजीविका का कोई साधन नहीं है। हर समय परिवार के पालन-पोषण की चिंता सताती रहती है।