शामली। शहर के तालाब रोड स्थित एक कॉलोनी में सोमवार सुबह पति से विवाद के बाद आदर्श मंडी थाने में तैनात महिला सिपाही रेखा ने चुनरी का फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। गनीमत रही कि समय रहते पति ने उसे देख लिया और फंदे से उतारकर उसकी जान बचा ली। महिला सिपाही को पहले शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत गंभीर होने पर उसे हरियाणा के पानीपत के अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
गाजियाबाद के मोदीनगर निवासी सिपाही कुशलपाल और हापुड़ निवासी महिला सिपाही रेखा दोनों आदर्श मंडी थाने में तैनात हैं और तालाब रोड स्थित एक कॉलोनी में किराये के मकान में रहते हैं। दंपती के दो बेटे हैं। बताया गया कि सोमवार सुबह करीब 8 बजे कुशलपाल दोनों बेटों को स्कूल छोड़ने गए थे। लौटने पर उन्होंने देखा कि पत्नी रेखा दरवाजे की कुंडी पर चुनरी के सहारे फंदे से लटकी हुई है। उन्होंने तुरंत उसे नीचे उतारा और मामले की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी।
सूचना पर एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह और आदर्श मंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। महिला सिपाही को पहले निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे पानीपत रेफर कर दिया गया।
पति का दावा—गलती से लगा फंदा, विवाद से किया इनकार
महिला सिपाही के पति कुशलपाल ने घटना को लेकर कहा कि उनकी पत्नी घर पर कपड़े सुखाने गई थी। इसी दौरान अचानक फंदा उसके गले में फंस गया। उन्होंने किसी भी प्रकार के विवाद या झगड़े की बात से इनकार किया है।
पति के डांटने पर उठाया आत्मघाती कदम
एसपी के अनुसार दंपती के दो बेटे हैं, जिनमें बड़ा बेटा सात साल और छोटा बेटा चार साल का है। रविवार को सिपाही का बड़ा बेटा साइकिल लेकर कहीं चला गया था, जिसको लेकर पति-पत्नी के बीच कहासुनी हुई थी। बताया गया कि पति ने रेखा को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए डांट लगाई थी। इसी से क्षुब्ध होकर उसने आत्मघाती कदम उठाया। सिपाही के गले की हड्डी टूटने और सांस लेने में दिक्कत होने की बात सामने आई है। मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है।
जरा-जरा सी बातों पर बढ़ रहे आत्मघाती कदम
महिला सिपाही के इस कदम से लोग हैरान हैं। जिला अस्पताल में हर माह पांच से छह ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें महिलाएं और युवा आत्मघाती प्रयास के बाद उपचार के लिए पहुंचते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. अरुण कुमार राय के अनुसार वर्तमान समय में संयुक्त परिवारों के टूटने से दंपतियों के बीच विवाद की स्थिति में मध्यस्थता करने वाला कोई नहीं होता। ऐसे में आक्रोश में आकर लोग आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी विवाद की स्थिति में जल्दबाजी में निर्णय न लें। पहले आपसी बातचीत से समस्या सुलझाने का प्रयास करें। यदि समाधान न निकले तो परिवार के भरोसेमंद सदस्य या विशेषज्ञ चिकित्सक की मदद लें।