शामली। बुधवार सुबह प्री मानसून बारिश और तेज हवा से होर्डिंग उखड़ गए। शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। एक घंटे की बारिश से शहर के कई मार्गों पर जलभराव हो गया। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई। लोगों को गर्मी से राहत मिली। उधर, कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बारिश खेतों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी।
तीन दिन भीषण गर्मी रहने के बाद बुुधवार को सुबह आठ बजे बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई। सुबह नौ बजे तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। तेज हवा के चलते जिले की बिजली आपूर्ति ठप हो गई।
सड़कों पर लगे होर्डिंग उखड़ गए। एक घंटे की बारिश के बाद मोहल्ला सलेकचंद विहार, बरखंडी, रामसागर, एसपी कार्यालय जाने वाला मार्ग , मोहल्ला रेलपार गली नंबर पांच में जलभराव हो गया। बारिश के बाद बुधवार को दिन का तापमान 28 डिग्री सेल्सियश रिकार्ड गया। पौने तीन बजे 32 डिग्री सेल्सियस और पौने चार बजे 33 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
उधर, बघरा कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉक्टर पीके सिंह ने बताया कि बुधवार को प्री मानसून बारिश हुई है। नौ जून तक बादल, बूूंदाबांदी और तेज हवाएं चलती रहेंगी। पूर्वी यमुना नहर खंड के जिलेेदार अंबुज कुमार ने बताया कि बुधवार को पांच एमएम बारिश रिकार्ड की गई। उपनिदेशक कृषि रामवीर कटारा का कहना है कि बारिश फसलों के लिए लाभदायक साबित होगी।
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार शाम से तेज हवाएं चलने से बुुधवार दोपहर तक दो दर्जन बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए है। तार टूूटने से चार घंटे बिजली आपूर्ति ठप रही है।
आम, लीची की फसल को भारी नुकसान
जिले में आम, लीची के ज्यादातर बाग है। पिछले सालों की अपेक्षा इस बार आम के बागों में बहुत कम फल आया है। कम फल आने के बाद अभी तक दो महीनों कई बार मौसम खराब होने के बावजूद 15-20 प्रतिशत आम की फसल को नुकसान पहुंचा है।
बुधवार को बारिश और तेज हवा के चलते लीची को 30-35 प्रतिशत नुकसान हुआ है। कैराना निवासी उमरदीन ने बाबरी में लाला हरिरतन लाल का आम एवं लीची मिलाकर कुल 800 बीघा का बाग लिया है। उमरदीन का कहना है कि बागों का अनुकूल मौसम न होने से आम लीची को नुकसान पहुंचा है।
95 लाख का दो साल के लिए बाग किराए पर लिया था। गरम मौसम ने उनकी हालत खराब कर दी है। मंडी आढ़ती बाबूराम सैनी का कहना है कि इस बार पिछले सालो की अपेक्षा आम की फसल 15-20 प्रतिशत कम है। पिछले दो माह से लगातार आंधी आने से आम की फसल प्रभावित हुई है। ज्यादा तापमान और बारिश का असर लौकी, तोरई, करेला की फसल पर पड़ा है।