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‘कर्म के अनुसार ही जीव को मिलता है फल’

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शामली कैराना रोड पर श्री रामकथा करते संत प्रवर विजय कौशल जी माहाराज - फोटो : SHAMLI
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शामली। संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने श्रीराम कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि त्रेता के भाई विपत्ति बांटते हैं और कलयुग के भाई संपत्ति बांटते हैं। संत प्रवर ने कहा कि संत और भगवंत जीव को जीवन जीने की दृष्टि प्रदान करते हैं। बताया कि कर्म के अनुसार ही मनुष्य को दंड या पुरस्कार मिलता है।
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कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्री राम कथा के आठवें दिन संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने भरत- राम का मिलन एवं अरण्यकांड में इंद्र के पुत्र जयंत की कथा का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया। संत प्रवर ने कहा कि संत और भगवंत जीव को जीवन जीने की दृष्टि प्रदान करते हैं। गुरु वशिष्ठ के समझाने पर भरत ने पिता महाराजा दशरथ का शास्त्रोक्त विधि से सरयू तट पर अंतिम संस्कार किया। सभी ने पवित्र सरयू नदी में स्नान कर वापस नगर लौट आए। सरयू स्नान की महत्ता बताते हुए कहा कि सरयू नदी में स्नान करने से बिना प्रयास के ही भगवान का सानिध्य मिलता है। गंगा स्नान से स्वर्ग अर्थात भौतिक सुख की प्राप्ति होती है, लेकिन सरयू स्नान से तो स्वयं भगवान की प्राप्ति हो जाती है। कौशल महाराज ने विधि का अर्थ बताते हुए कहा कि जिसकी यहां विधि बिगड़ जाती है, उसकी वहां लोक की विधि भी बिगड़ जाती है। कर्म के अनुसार ही मनुष्य को दंड या पुरस्कार मिलता है। दशरथ जी ने कर्म से अपनी विधि बिगाड़ ली, इसलिए उन्हें हानि उठानी पड़ी, अपयश का भागी बनना पड़ा और मृत्यु को प्राप्त होना पड़ा। इसलिए जीवन में जरूरी है कि अपनी विधि को मत बिगड़ो। भरत के संबंध में गोस्वामी तुलसीदास ने धीर धुरंधर’ शब्द का प्रयोग किया है। कहते हैं कि वह धर्म-कर्म जल जाए जो हमें भगवान से दूर करता है। विजयकौशल महाराज ने में इंद्र के पुत्र जयंत की कथा सुनाई।

शामली कैराना रोड पर श्री रामकथा में भाग लेते श्रद्वांलू- फोटो : SHAMLI

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