शामली। सरकारी अस्पतालों में सरकार एक तरफ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत मिलने वाली प्रसवोत्तर देखभाल सहायता राशि समय पर नहीं मिल पा रही है। शासनादेश में यह धनराशि 48 घंटे में प्रसूता के खाते में भेजे जाने का प्रावधान है। मगर हकीकत में एक साल तक का इंतजार लाभार्थियों को कराया जा रहा है।
जिले में 24 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 9440 संस्थागत प्रसव हुए। इनका भुगतान प्रसूताओं के खाते में अभी तक नहीं पहुंचा है। एक अप्रैल 2026 से सात अगस्त तक सरकारी अस्पतालों में 5731 संस्थागत प्रसव हुए। इनमें 4186 प्रसूताओं को ही जेएसवाई की सहायता राशि मिल पाई है जबकि 1545 महिलाओं का भुगतान लटका हुआ है।
n केस एक : गांव चूनसा निवासी वसीम ने बताया कि 21 अक्तूबर 2025 को सीएचसी में उनकी पत्नी शाइस्ता की डिलीवरी हुई थी। वह भुगतान के लिए दस बार सीएचसी पर आ चुका है। उनके बैंक खाते की डिटेल अपडेट है, लेकिन अभी तक धनराशि नहीं पहुंची।
n केस दो : शहर के दिल्ली रोड निवासी हसीन ने बताया कि उसकी पत्नी फराना की सीएचसी पर 12 अप्रैल को डिलीवरी हुई थी।
अभी तक बैंक खाते में भुगतान नहीं पहुंचा।