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पुलिस की लापरवाही और सड़क किनारे खडे़े वाहन लगावाते है जाम

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शामली।
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शहर के लिए ट्रैफिक जाम को नासूर बनाने में ट्रैफिक पुलिस की भूमिका कुछ कम नहीं है। कहने को चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती हैं, लेकिन वह ड्यूटी से ज्यादा आराम को तरजीह दी जाती है। ट्रैफिक कंट्रोल के लिए होमगार्ड को आगे करके खुद कुर्सी पर आराम फरमाते हैं। अमर उजाला टीम ने बुधवार को शहर के गुरुद्वारा तिराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था और जाम से होने वाली परेशानी का हाल देखा, तो यही तस्वीर सामने आई।
गुरुद्वारा तिराहे से मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से आने और जाने वाले भारी वाहन और यात्री वाहनों की अधिकता रहती है। तिराहे के पास ही धीमानपुरा रेलवे क्रासिंग भी है। ट्रेनों के आवागमन के दौरान फाटक बंद होने पर यहां ट्रैफिक जाम लग जाता है। यहां जाम लगने के बाद मुजफ्फरनगर मार्ग, रेलपार बाईपास और शहर की तरफ वाहनों की लंबी लाइन लग जाती है। यातायात सुचारु होने में करीब एक घंटा लग जाता है। यह हालत दिनभर बनी रहती है, जिस कारण लोगों को जाम में फंसकर परेशानियां उठानी पड़ती हैं।
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खास बात यह है कि गुरुद्वारा तिराहा और धीमानपुरा रेलवे क्रासिंग पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के अलावा होमगार्ड भी तैनात हैं। बावजूद इसके ट्रैफिक जाम लगने पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी हरकत में नहीं आते हैं। होमगार्ड ही ट्रैफिक कंट्रोल करने में लगता है, जबकि सिपाही सड़क किनारे कुर्सी पर आराम फरमाते हैं।
वहीं, गुरुद्वारा तिराहे पर सड़क पर ही यात्री बसें खड़ी होती हैं। इसके ठीक सामने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी है। पुलिसकर्मी इन बसों को हटवाने की जरूरत नहीं समझते, जिस कारण ट्रैफिक जाम लगने के बाद हालत खराब हो जाती है। यदि ट्रैफिक कंट्रोल करने में पुलिसकर्मी जरा भी गंभीरता बरतें, तो रोजाना होने वाली इस परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।

अफसरों के वाहन निकालने में दिखाते हैं मुस्तैदी
पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों के वाहन आने के दौरान गुरुद्वारा तिराहे पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी पूरी सजगता दिखाते हैं। ताकि अफसरों को लगे कि ट्रैफिक सिपाही ठीक से कार्य कर रहा है, लेकिन जैसे ही अधिकारी का वाहन वहां से गुजरा, तो सिपाही फिर से उसी मुद्रा में सड़क किनारे पहुंच जाते हैं।

गुरुद्वारा तिराहे पर जाम लगने के कुछ कारण
- गुरुद्वारे के सामने यात्री बसें सड़क पर खड़ी होती हैं। यात्रियों को बैठाने तक बसें वहां से नहीं हटती। साथ ही ई रिक्शा और रेहड़ी खड़ी रहती हैं। जिस कारण आधी सड़क पर बस वालों का कब्जा रहता है।
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- सड़क के दूसरी तरफ पैट्रोल पंप के सामने भी बसों को सड़क पर रोक कर ही सवारियां उतारी जाती हैं। बसों के इंतजार में ई रिक्शा चालक भी खड़े रहते हैं।
- बाईपास की ओर आने और जाने वाले भारी वाहनों के बीच में बार बार छोटे वाहन घुस जाते हैं। यदि ट्रैफिक कंट्रोल ठीक से किया जाए, तो यातायात नियमों को तोड़ने वाले ऐसे वाहन चालकों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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