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बाहर भीतर झांक रहा है, शायद कीमत आंक रहा है

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शामली। समकालीन साहित्यिक संस्था चेतना की ओर से सरतीदेवी राजाराम पब्लिक स्कूल में काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इसमें कवि, गजलकार और गीतकारों ने एक से बढ़कर एक रचना सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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शनिवार शाम आयोजित काव्य संध्या का शुभारंभ मां शारदे की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इस दौरान कवि अनिल पोपट ने रचना पढ़ी- जिंदा मर गया है मैंने कहा अगर आदमी, जिंदा है तो कैसे मर सकता है, वो बोले आदमी तो मर गया, पर उसका नाम जिंदा था। कवयित्री पूजा वशिष्ठ ने अपनी रचना सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। विख्यात गीतकार शिवकुमार शुक्ल ने गीत सुनाया- बाहर भीतर झांक रहा है शायद कीमत आंक रहा है, दुख की काली अचकन सीकर, बटन खुशी के टांक रहा है। गीतकार विष्णु पारस ने पढ़ा- तट तोड़कर नदियां बही सागर मगर छलका नहीं, ये दोष है रफ्तार का, ये दोष तो जल का नहीं। गजलकार ओंकार गुलशन ने पढ़ा- गर्दिशे वक्त जवान है अभी, मुश्किल में है मेरी जान अभी, जिंदगी सिर्फ ये बता दे मुझे, और कितने इम्तिहान हैं अभी। इनके अलावा लालसिंह लचक ने मां शारदे की वंदना प्रस्तुत की। अनुराग शर्मा ने भी अपनी रचना प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता शायर विनोद अश्क ने की। इसके बाद अतिथियों को चेतना श्री के सम्मान से नवाजा गया। इस दौरान नीरज संगल, रुचिर गोयल, डाक्टर मोहन लाल, डाक्टर कृष्ण गोपाल, अनिल रस्तोगी, प्रमेंद्र सिंह, नीलेश वशिष्ठ, संदीप गर्ग, राकेश कौशिक, प्रीति कौशिक, कविता, संगीता, शिवकुमार सैन, पंकज गुप्ता, हिमांशु, राकेश शर्मा, पूरन, गुरुमुख सिंह, राजकुमार गर्ग, पुनीत द्विवेदी, संजय कौशिक और संजय गोयल आदि मौजूद रहे।
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