कैराना। किसानों के लिए सिर दर्द बनी मामौर झील के जीर्णोद्घार का काम कागजों तक सिमट कर रह गया है। राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना के तहत इसका जीर्णोद्धार होना था, लेकिन सांसद हुकुम सिंह का निधन होने के बाद इसकी कवायद थम गई। अब हालत यह है कि झील के कारण ना तो आसपास के खेतों में खेती हो पा रही और न ही आसपास के गांवों का पानी पीने लायक बचा है।
कैराना क्षेत्र में गांव मामौर के पास बनी सैकड़ों बीघा जमीन पर झील में यूं तो भूजल रिचार्ज का अहम स्रोत है, लेकिन कैराना शहर का गंदा पानी नाले द्वारा मामौर झील में डाला जाता है। जिस कारण आसपास के गांवों का भूजल भी खराब हो गया है और बीमारियां फैल रही हैं। यहीं नहीं बरसात के मौसम में झील ओवरफ्लो हो जाती है। जिस कारण आस-पास की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो जाती हैं। ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए सांसद हुकुम सिंह ने एक साल पूर्व राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना के तहत मामौर झील के जीर्णोद्धार की कवायद शुरु कराई थी। इसके बाद डीएम, वन विभाग व सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने दो बार झील का निरीक्षण किया था। साथ ही गंगा विचार मंच के समन्वयक उमर सैफ के प्रयासों से झील पर बायो गैस प्लांट लगाने व बटर फ्लाई बनाने के लिए विदेशी वैज्ञानिकों की पांच सदस्यीय टीम ने भी झील का निरीक्षण किया था। तब से अभी तक मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। उधर, गत फरवरी में सांसद हुकुम सिंह का निधन होने के बाद उनका सपना भी अधूरा रह गया तथा झील आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
क्या बोले ग्रामीण
- गांव मामौर निवासी नफीस ने बताया कि उसकी 12 बीघा जमीन पर पिछले दो सालों से झील का गंदा पानी भरा होने के कारण उसने कोई फसल नहीं बोई।
- आलम अली ने बताया कि पिछले साल 10 बीघा में ईख बोई थी, लेकिन कुछ दिन बाद ही ईख में झील का गंदा पानी भरने से सारा ईख खराब हो गया था। जिसके बाद दोबारा हिम्मत नहीं हुई कि खेती करे।
- रईसूद्दीन ने बताया कि उनकी तीन बीघा जमीन झील के पास है, लेकिन झील का पानी हर समय भरा रहने के कारण जमीन बेकार हो गई।
- नोसीम अहमद ने बताया कि छह बीघा जमीन पर पिछले तीन सालों से उन्होंने पैर तक नहीं रखा, क्योंकि वहां पर खेती नहीं होती। यदि मेहनत कर खेती करते भी है तो झील का पानी खेती को खराब कर देता है। इसके अलावा साबिर और हारुण की भी छह-छह बीघा जमीन झील के पानी के भरने से खराब पड़ी है।
- ग्राम प्रधान नूरदीन ने बताया कि हमारी 11 बीघा जमीन झील के पानी में डूबी हुई है। डेढ़ माह पहले वह पंजीठ के प्रधान इरशाद व अन्य ग्रामीणों के साथ मेरठ जाकर अधिकारियों से मिले थे, लेकिन झील का समाधान नहीं हुआ। झील के गंदे पानी के कारण भूजल पीने लायक नहीं रहा। गांव में काला पीलिया व कैंसर की बीमारी पैर पसार रही हैं। कैराना से आने वाले गंदे पानी को रोका जाए या झील के पानी को साफ करने का प्लांट लगाया जाए।
जिला वन अधिकारी ए के सक्सेना ने बताया कि अभी योजना को अंतिम रूप नहीं दिया गया। कई विभाग योजना बनाने में लगे है। प्रस्ताव तैयार करने के बाद बजट के लिए उसे शासन को भेजा जाएगा। - एके सक्सेना, प्रभागीय वनाधिकारी