अधूरे पड़े शामली बाईपास के बैनामों की प्रक्रिया शुरू होगी
शामली। दिल्ली- यमुनोत्री- सहारनपुर वाया देहरादून फोरलेन को जोड़ने वाले शामली बाईपास की सालों बाद निर्माण की प्रक्रिया के तहत किसानों के मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया पुन: चालू हो गई है। राष्ट्रीय राज्य राजमार्ग प्राधिकरण बागपत के अधिकारियों की टीम ने मंगलवार को डीएम से मिलकर शामली बाईपास की भूमि की जद में आ रहे अवशेष किसानों के जमीन के बैनामा कराए जाने का अनुरोध किया है। डीएम ने टीम को आश्वासन दिया कि वह एडीएम वित्त राजस्व केबी सिंह से मिलकर बैनामा प्रक्रिया शुरू कराएंगे।
दिल्ली-यमुनोत्री, सहारनपुर वाया देहरादून फोरलेन का कार्य पहले उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण उपशा की देखरेख मे किए जा रहे थे। शामली बाईपास की जद में शामली, सिंभालका, बलवा, सेहटा, बनत के पांच गांव के किसानों की भूमि को शामिल किया गया था। उपशा शामली बाईपास के दो साल तक 158 बैनामे करा चुकी है। 22 बैनामों में बनत के 18, शामली का एक और , बलवा के तीन बैनामा शामिल हैं। इसके बाद में प्रदेश सरकार ने दिल्ली - यमुनोत्री, सहारनपुुर फोरलेन को राष्ट्रीय राज राज्य मार्ग प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दिया गया था। प्रदेश सरकार ने उपशा के माध्यम से अवशेष धनराशि जिला मुख्यालय से मंगा ली गई थी। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस हाईवे के शुभारंभ में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली- यमुनोत्री फोरलेन को देहरादून तक जोड़ने व शामली बाईपास का निर्माण कराने व टेंडर छोड़ जाने व जुलाई में भूमि पूजन की घोषणा की गई। राष्ट्रीय राज्यमार्ग प्राधिकरण के बागपत कार्यालय से संबद्ध राहुलदेव ने मंगलवार को शामली में डीएम इंद्र विक्रम सिंह से मिलकर शामली बाईपास निर्माण की प्रक्रिया के तहत किसानों के साथ बैठक मुआवजा प्रक्रिया पूूूरी कराने का अनुरोध किया। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि शामली बाईपास के बैनामों की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एडीएम वित्त राजस्व को लगाया गया है। राष्ट्रीय राज राज्यमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी राहुल दुबे ने बताया कि शामली बाईपास बैनामा प्रक्रिया शुरू करने के लिए एडीएम वित्त व राजस्व के कैराना संपूर्ण समाधान दिवस मे होने के कारण मुलाकात नही हो पाई हैं। बनत, शामली, बलवा के किसान उनसे मिलकर मुआवजा संबंधी वार्ता कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र के किसानों को सर्किल रेट से दो गुना व ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को चार गुणा मुआवजा दिए जाने का प्राविधान है।