जलालाबाद के मदरसा मिफता उल उलूम वार्षिक जलसे मौजूद मुफ्ती कासिम व मौलाना अय्यूब मिफताही व अन्य।
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56 तलबाओं को मौलवी, 14 को मुफ्ती की उपाधि
जलालाबाद। कस्बे के मदरसा मिफता उल उलूम में वार्षिक जलसे का आयोजन मदरसा संचालक मौलाना वलीउल्लाह खान की अध्यक्षता में हुआ। संचालन मौलाना अय्यूब मिफताही ने किया। जलसे में मौलवी की तालीम पूरी करने वाले 56 तलबाओं से पुस्तक बुखारी शरीफ सुना गया। जलसे में दूरदराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
मुफ्ती कासिम ने रोजा और नमाज के बारे में बताया कि प्रत्येक इस्लाम के मानने वाले का इनको पूर्ण ईमानदारी के साथ अदा करना अहम फर्ज है। मौलाना रफीउल जमा ने कहा कि इस्लाम भाईचारे की सीख देता है। मौलाना रईस ने बताया कि कुरान शरीफ पर चलने वाला कभी जीवन में भटक नहीं सकता है। कुरान शरीफ के बताए मार्ग पर हमें चलना चाहिए। मौलाना सलीम ने बताया कि बुखारी शरीफ पुस्तक में हदीस के बारे में विस्तार से बताया गया है।
मौलाना सालिम ने बताया कि बुखारी शरीफ में पैगंबर की परंपराओं या हदीसों का मुस्लिम विद्वान मोहम्मद अल बुखारी ने संकलित किया है। इसलिए इस पवित्र पुस्तक का नाम बुखारी शरीफ है। जलसे में मौलाना अलीम, मौलाना सारिक, मुन्नू मियां ने भी विचार रखे। 56 तलबाओं को मौलवी, 14 को मुफ्ती की उपाधि से नवाजा गया। जलसे के समापन पर पूरी दुनिया में अमन के लिए दुआ की गई।