शामली/कैराना। शहर की जामा मस्जिद पर रमजान माह के तीसरे जुमे की नमाज अदा कर अकीदतमंदों ने देश दुनिया में अमन चैन की दुआ मांगी।
शुक्रवार दोपहर करीब 1.25 बजे मौलाना शौकीन ने नमाज अदा कराई। जामा मस्जिद पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों जुमे की नमाज अदा करने पहुंचे। भीड़ अधिक होने के कारण कुछ लोग मस्जिद के बाहर बड़ा बाजार में अकीदतमंदों ने नमाज अदा की। इस दौरान मौलाना शौकीन ने कहा कि रमजान का महीना सभी के लिए बेहद खास होता है। अल्लाह की इबादत करना, रमजान रखना और भलाई के कार्य करना ही इस्लाम हमें सिखाता है। वहीं, ढेड़ बजे कुरेशियान मस्जिद पर मौलाना अयूब ने नमाज अदा कराई। उधर, कैराना में रहमत, अज्मत और मगफिरत के महीने मुकद्दस रमजान-उल-मुबारक के तीसरे जुमे की नमाज क्षेत्र में अकीदत के साथ अदा की गई। जामा मस्जिद में शाही इमाम मौलाना ताहिर हसन ने हजारों अकीदतमंदों को नमाज अदा कराई। नमाज से पूर्व मदरसा जामिअतुस्सादह के प्रबंध संचालक मौलाना इरफान साकिब कासमी ने कहा कि जिस मुस्लिम के पास साढ़े सात तौला सोना या 52 तौला चांदी या फिर इनकी कीमत हैं और उन्हें एक साल हो चुका है, तो उस व्यक्ति पर जकात फर्ज है। उक्त माल में से उसे ढाई प्रतिशत के हिसाब से जकात अदा करनी होगी। जकात आम तौर से रमजान शरीफ में अदा की जाती है, जोकि गरीब-असहाय, मदरसे और मजलूमों में दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि फितरा भी साहिब-ए-हैसियत के मुताबिक हर मुसलमान पर फर्ज है, जिसमें हर शख्स को पौने दो किलो गेहूं या फिर इसकी कीमत अदा करनी चाहिए। इसके अलावा ईदगाह वाली, सराय वाली, धोला पीर वाली, बीबो वाली (बस अड्डे वाली), एमपी वाली, दरबार वाली, गुली वाली, खजूरो वाली, हसनी वाली, मक्की मस्जिद, मदरसा इशातुल इस्लाम वाली मस्जिद के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नंगलाराई, मोहम्मदपुर राई, भूरा, गंदराऊ, इस्सोपुर खुरगान, गोगवान, रामडा, पंजीठ, तितरवाड़ा आदि गांवों में भी नमाज अदा की गई।