मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। बदलते मौसम में सावधानी नहीं बरतने पर लोग तेजी के साथ संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे भी बीमारियां फैलने के लिहाज से जुलाई, अगस्त और सितंबर को संवेदनशील माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े पर नजर डालें, तो दो महीने में ही शामली सीएचसी पर करीब 40,000 मरीज ओपीडी में आ चुके है, जिनमें 40 प्रतिशत से ज्यादा मरीज वायरल बुखार, नजला जुकाम से पीड़ित रहे हैं।
शामली जिला अस्पताल के रूप में काम कर रही सीएचसी में पूरे जिले के मरीज आते हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बारिश होने के बाद मौसम में बदलाव आता है। जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में लोग सबसे ज्यादा बीमारियों से पीड़ित होते हैं। अभी तक शामली सीएचसी की बात करें तो जुलाई में करीब 19 हजार मरीजों ने ओपीडी में अपना उपचार कराया। डॉक्टरों का मानना है कि इनमें से 35 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार, नजला जुकाम से पीड़ित रहे हैं। इसके अलावा अगस्त माह की 28 तारीख तक ओपीडी में करीब 21 हजार मरीज उपचार के लिए आ चुके हैं। इस माह में 40 प्रतिशत से अधिक मरीज वायरल से पीड़ित थे। इनके अलावा मौसम परिवर्तन के साथ ही बुखार, नजला-जुकाम के मरीजों की संख्या लगातार अस्पताल में बढ़ती जा रही है, जबकि अभी पूरा सितंबर माह बाकी है।
सावधानी बरतना जरूरी
शामली सीएचसी प्रभारी डॉक्टर जगमोहन का कहना है कि इस सीजन में सतर्कता और जागरूकता ही लोगों को बीमारी से बचा सकती है। उन्होंने कहा कि आसपास सफाई का ध्यान रखे और मच्छरों को पैदा नहीं होने दें। दवाई का छिड़काव व्यक्तिगत स्तर पर भी करते रहे। इसके साथ ही यदि बुखार हो जाए, तो तत्काल सरकारी अस्पताल में आकर अपना इलाज कराएं, ताकि बीमारी बढ़ न पाए।
कराया जा रहा है छिड़काव
जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर विनय कुमार का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर सीएचसी पर दवाईयां भेेजी गई हैं, ताकि क्षेत्र में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा सके। वह भी स्वयं गांवों में जाकर छिड़काव करा रहे हैं, ताकि गांव में मच्छरों का प्रकोप कम हो। इसके साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जगह-जगह छिड़काव कराया जा रहा है, दवाइयों की उपलब्धता है, जिस गांव में मरीज ज्यादा होते है, वहां कैंप लगवाकर चेकअप कराया जाता है और दवाइयां वितरित की जाती है।
--डॉक्टर राजकुमार, सीएमओ