जीएसटी लागू होने के साथ ही व्यापारियों के सामने अनेक तरह की कठिनाइयां आनी शुरू हो गई। जीएसटी के तहत व्यापारियों को 200 रुपये से ऊपर के सामान की बिक्री पर पक्का बिल देना होगा। 20 लाख रुपये वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। डेढ़ करोड़ से ऊपर के टर्न ओवर वाले व्यापारियों को प्रत्येक सामान की बिक्री पर एचएसएन कोड अंकित करना होगा। एचएसएन कोड को लेकर ही अधिकांश व्यापारी परेशान हैं।
जीएसटी लागू होने पर शनिवार को वाणिज्यकर कार्यालय में जीएसटी दिवस मनाया गया। इस दौरान सहारनपुर से आए ज्वाइंट कमिश्नर एके जैन और डिप्टी कमिश्नर एके दोहरे ने जीएसटी दिवस का शुभारंभ किया। कार्यालय में पहुंचे उद्यमी वेदप्रकाश आर्य, अशोक बंसल, नरेंद्र अग्रवाल, व्यापारी नेता घनश्यामदास गर्ग, सुभाष धीमान सहित अन्य व्यापारियों ने वाणिज्यकर अधिकारियों से मुलाकात कर एचएसएन कोड, नई बिल बुक, ईवे बिल सहित विभिन्न समस्याएं बताईं। इस दौरान वाणिज्यकर अधिकारी पीडी गुप्ता, एपी राय, एसपी मलिक, रवि कुमार सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
--- हेल्प डेस्क पर पहुंचीं समस्याएं
वाणिज्यकर कार्यालय पर हेल्प डेस्क बनाई गई है, जहां शनिवार को पहले ही दिन काफी समस्याएं पहुंची। दवा व्यापारी देवराज मलिक, गौरव कुमार, मुकेश कुमार, सुमेश मित्तल तथा डाक्टर नरेंद्र सिंह ने वहां पहुंचकर बताया कि कुछ दवाओं पर एचएसएन कोड अंकित है, जबकि कुछ दवाओं पर नहीं है। हर ग्राहक को दवा खरीदने पर बिल में एचएसएन कोड दर्ज करने में दिक्कत सामने आ रही है। वहीं, भनेड़ा उददा में किसान सेवा केंद्र संचालक आजाद खान ने हेल्प डेस्क पर कॉल करके बताया कि बायो फर्टिलाइजर माइक्रो न्यूटोन का एचएसएन कोड नहीं मिल रहा है, उसकी बिक्री पर जीएसटी कितना लगेगा और किस तरह बिल बनाकर देंगे। कुछ व्यापारियों ने जीएसटीएन मिलने में आ रही दिक्कतें भी अधिकारियों को बताई।
वर्गीकृत और अवर्गीकृत वस्तुओं में जीएसटी का फर्क
जिन वस्तुओं को वित्त मंत्रालय ने वर्गीकृत कर दिया है, उन पर जीएसटी की दर निर्धारित कर दी गई है। जिन वस्तुओं को एचएसएन कोड नहीं है, वह अवर्गीकृत श्रेणी में रखी गई हैं। ऐसी सभी वस्तुओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने का प्राविधान है। एचएसएन कोड के बगैर रिटर्न भी दाखिल नहीं होगा।
क्या है एचएसएन कोड
एचएसएन (हार्मोनाइज्ड सिस्टम नोमेनक्लेचर) कोड केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से हर वस्तुओं का अलग अलग जारी किया गया है। करीब चार हजार से ज्यादा वस्तुओं को यह कोड जारी किया जा चुका है, जबकि अब भी बड़ी संख्या में एचएसएन कोड जारी नहीं हुए हैं। इनमें डिस्पोजल गिलास, लकड़ी की चम्मच और फर्टिलाइजर से संबंधी काफी वस्तुएं हैं, जिन्हें एचएसएन कोड नहीं मिला है।
पुराने केसों में चलती रहेगी कार्रवाई
वाणिज्यकर विभाग के जिले में तीन खंड है। प्रथम, द्वितीय और तृतीय। तीनों खंडों में करीब 4035 व्यापारी रजिस्टर्ड हैं, जिसके टैक्स निर्धारण संबंधी मामले वाणिज्यकर कार्यालय में चलते हैं। अभी तक 2013-14, 2014-15 के करीब 60 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में टैक्स का निर्धारण हो गया है, जबकि 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के केसों का निर्धारण नहीं हुआ है। वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर एके दोहरे ने बताया कि अधिकांश मामलों में स्वत: कर निर्धारण के आधार पर निस्तारण होता है, कुछ ही मामलों में सीटीओ स्तर से निर्धारण होता है।
खत्म हो जाएगा फाइलों का खेल
अभी तक वाणिज्यकर कार्यालय में फाइलों का भंडार रहता था। कार्यालय में तीन खंडों के तीन अभिलेख कक्ष हैं, जिनमें फाइलें भरी बड़ी हैं। जीएसटी लागू होने से तमाम कार्य ऑनलाइन हो जाएंगे। पुराने रिकार्ड के संबंध में वाणिज्यकर अधिकारियों का कहना है कि अभी 10 साल तक इस रिकार्ड को सुरक्षित रखा जाएगा। बाद में इन अभिलेखों के संबंध में कोई निर्णय होगा।