दस साल में घट गई 2303 हेक्टेयर कृषि भूमि
शामली। जिले में कृषि भूमि साल दर साल घट रही है। 2011 के बाद से जनपद में 2303 हेक्टेयर कृषि भूमि कम हो गई है। इसमें ज्यादातर भूमि हाईवे और बाईपास निर्माण में गई है। आगे भी प्रस्तावित हाईवे और बाईपास में जमीन जाएगी। आवासीय गतिविधियां बढ़ने से भी कृषि भूमि का क्षेत्रफल कम हुआ है।
शामली 2011 में नया जिला बना था। उस समय जिले में कुल कृषि भूमि 107997 हेक्टेयर थी। 2018-19 में कृषि भूमि का क्षेत्रफल घटकर 106008 हेक्टेयर हो गया था। इसके बाद जिले में बाईपास और हाईवे का निर्माण हुआ। इनमें लगभग 316 हेक्टेयर भूमि गई है। इसमें ज्यादातर कृषि भूमि ही है। इस तरह बीते दस वर्षों में जिले में कृषि भूमि का क्षेत्रफल 2303 हेक्टेयर कम होकर 105694 हेक्टेयर रह गया है।
हाईवे और बाईपास के अलावा जिले में कोई बड़ी आवासीय परियोजना नहीं बनी है, लेकिन निजी कॉलोनियां खूब काटी गई हैं। हालांकि इनका रकबा ज्यादा नहीं है, लेकिन जिला मुख्यालय के आसपास नवीन जिला मुख्यालय, पूर्वी यमुना नहर के किनारे कई कॉलोनियां काटी गई हैं। इनमें भी कृषि भूमि का काफी क्षेत्रफल गया है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर सिंह का कहना है कि कुछ कृषि भूमि हाईवे निर्माण एवं आवासीय गतिविधियों में गई है, लेकिन बंजर एवं कृषि के लिए अनुपयोगी भूमि का सुधार कर उसे कृषि योग्य बनाया भी गया है। इससे कृषि भूमि के क्षेत्रफल में बहुत ज्यादा कमी नहीं आई।
घट रहा रकबा, बढ़ रहा उत्पादन
शामली। कृषि भूमि का क्षेत्रफल घटने के बावजूद फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है। जिले में सबसे ज्यादा गन्ने का उत्पादन होता है। गेेहूं और धान के मुकाबले गन्ने का रकबा बढ़ा है और इसका उत्पादन भी बढ़ा है, लेकिन गेहूं का रकबा कम हुआ है। 2015-16 के बाद गेहूं का रकबा लगभग 4000 हेक्टेयर घटा है, जबकि उत्पादन 10735 मीट्रिक टन बढ़ा है। धान का रकबा बीते पांच वर्षों से लगभग समान ही चल रहा है, लेकिन उत्पादन में लगभग 5000 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई है।
बढ़ रही रसायनिक उर्वरकों की खपत
रकबा घटने के साथ उत्पादन बढ़ने का प्रमुख कारण रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग को माना जा रहा है। वर्तमान में एक साल में जिले में रसायनिक उर्वरक की खपत 39 हजार 800 मीट्रिक टन है, जबकि दस साल पहले उर्वरक की खपत 31 से 32 हजार मीट्रिक टन प्रतिवर्ष के आसपास थी।
इन परियोजनाओं में गई कृषि भूमि
- मेरठ-करनाल हाईवे चौड़ीकरण एवं बाईपास
- पानीपत-खटीमा हाईवे एवं बाईपास
- दिल्ली-शामली-सहारनपुर हाईवे एवं बाईपास।
- दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर (प्रस्तावित)।
- नवीन जिला मुख्यालय पर विकसित आवासीय गतिविधि