विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरूआत मंगलवार से हो गई। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में डाक्टरों ने इसके बारे में पत्रकारों की जानकारी दी। डॉक्टरों ने बताया कि यदि मां अपने बच्चे को अपना दूध पिलाएं तो बच्चा कुपोषित नहीं हो सकता।
पत्रकार वार्ता में सीएमओ डॉ. सफल कुमार ने बताया कि एक से लेकर सात अगस्त तक विश्व स्तनपान दिवस का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे सप्ताह में ब्लॉक स्तर पर एडीडी प्रशिक्षण के दौरान आशा, आंगनबाड़ी व एएनएम का स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए संवेदीकरण किया जाएगा। इसके अलावा आशाओं द्वारा दो वर्ष तक बच्चे वाले परिवारों की सूची तैयार कर भ्रमण किया जाएगा। परिवारों को स्तनपान के लाभ के बारे में बताया जाएगा। एसीएमओ डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि पूरे देश में मात्र 25.2 प्रतिशत महिलाएं ही दो साल तक ऊपरी आहार के साथ स्तनपान कराती हैं, जबकि 41.6 प्रतिशत महिलाएं छह तक तक स्तनपान कराती हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि यदि महिलाएं अपने बच्चे को जन्म के बाद एक घंटे के भीतर मां का दूध, उसके बाद छह महीने तक दूध सिर्फ मां का दूध और दो साल मां का दूध और साथ ही में अन्य आहार दे तो मृत्युदर में 13 प्रतिशत की कमी आ जाती है।