कैराना के मंडावर में तटबंध के अंदर फसलों में भरा यमुना का पानी।
- फोटो : SHAMLI
कैराना (शामली)। एक सप्ताह से बसेड़ा में यमुना तटबंध के अंदर करीब 200 बीघा धान की फसलों में पानी भरा हुआ है, जिस कारण किसानों की लाखों रुपये की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की हैं। प्रशासन ने टीम गठित कर बारिश व बाढ़ के पानी से हुए फसलों के नुकसान का सर्वे कराना शुरू किया।
कैराना तहसील क्षेत्र के गांव बसेड़ा निवासी किसानों ने अपने अपने खेतों में करीब 200 बीघा धान की फसलें बोई हुई थी। किसानों ने बताया कि एक सप्ताह पहले उनकी फसलों में बारिश का पानी भर गया था। पानी की निकासी न होने से धान की फसलें पानी में पूरी तरह डूब गई हैं। लगातार पानी भरा होने से फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसान अली शेर की 20 बीघा, अकबरी की 15 बीघा, बिद्दा की 26 बीघा, यामीन की 3 बीघा, सराफत की 12 बीघा, असलम की 24 बीघा, साजिद की 15 बीघा, मेहरबान की 5 बीघा, सराफत की 12 बीघा, इसराना की 11 बीघा, सादीन की 10 बीघा, शमीम की 10 बीघा, सरवर की 10 बीघा व असलम की 10 बीघा धान की फसलों में एक सप्ताह से पानी भरा हुआ है।
पीड़ित किसानों ने बताया कि एक बीघा धान की फसल तैयार करने में करीब पांच हजार का खर्च आता है। एक सप्ताह से धान की फसल में 4-4 फिट तक पानी भरा होने के कारण फसल गलने लगी है इससे उनका लाखों रुपये का नुकसान हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मुआवजा देने की मांग की है। तहसीलदार राजकुमार भारती ने बताया कि आज सुबह ही हल्का लेखपाल, चकबंदी व राजस्व विभाग के लोगों की एक टीम गठित की गई है, जो क्षेत्र में जाकर बारिश व बाढ़ के पानी से हुए फसलों के नुकसान का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेंगी। रिपोर्ट के आधार पर ही किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
कैराना के बसेड़ा में धान की फसल में भरा बरसात का पानी।- फोटो : SHAMLI
कैराना के बसेडा में बरसात के पानी से धान की फसल को हुए नुकसान के मुआवजे की मांग करते किसान- फोटो : SHAMLI