शामली। आर्य समाज के 143 वें स्थापना दिवस कार्यक्रम वैदिक ध्वजारोहण, वैदिक यज्ञ एवं भजन उपदेश के साथ प्रारंभ हो गया। आर्य समाज के विद्वान संयासियों और भजनोपदेशक ने प्रवचनों एवं भजनों के माध्यम से वेद वाणी का प्रचार कर मार्ग दर्शन किया।
शुक्रवार को आर्य समाज के 143 वें स्थापना दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आर्य समाज के संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, प्रधान पूरण चंद आर्य एवं आर्य उपदेशक स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, स्वामी सत्यवेश, आचार्य शैलेष मुनि, आर्य विद्या सभा के प्रधान राजपाल सिंह आर्य ने संयुक्त रूप से वैदिक ध्वज फहराया। इसके बाद वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती महाराज तथा पुरोहित डाक्टर रविदत्त शर्मा रहे। मुख्य यज्ञमान राजीव आर्य-मिथलेश आर्य, देवेंद्र आर्य विक्की, राजवती आर्य, पवन कुमार आर्य-शशिबाला आर्य और भूषण जिंदल-संगीता जिंदल रहे। सभा भवन में आयोजित भजन-प्रवचन के कार्यक्रम में हरियाणा के पलवल से पधारे स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने कहा कि धर्म का मार्ग बहुत कठिन है। अधर्म के मार्ग पर चलकर नैतिक सुखों की प्राप्ति तो आसानी से हो जाती है, लेकिन मनुष्य आत्मिक दु:ख के सागर में डूबता चला जाता है। धार्मिक विघटन के कारण लोग वैदिक संस्कृति से दूर हो रहे हैं। आर्य समाज के सिद्धांतों पर चलकर परिवार अज्ञैर देश की दशा एवं दिशा सुधारी जा सकती है। भजनोपदेशक प्रदीप शास्त्री ने भजन प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के अध्यक्ष करण सिंह तथा कार्यक्रम अध्यक्ष व्यापारी नेता घनश्याम दास गर्ग रहे। दोपहर में आर्य समाज से मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में आर्य समाज, आर्य विद्या सभा, स्त्री आर्य समाज, आर्य वीरांगना परिषद, आर्य युवक परिषद तथा आर्यवीर दल के पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल रहे। शोभायात्रा में शामिल रथ पर आर्य समाज के विद्वान संयासी विराजमान रहे। कार्यक्रम के संयोजक गिरधारी लाल आर्य, सहसंयोजक रामकुमार गुप्ता रहे। इस अवसर पर संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, प्रधान पूरण चंद आर्य, मंत्री रामेश्वर दत्त आर्य, राजपाल सिंह आर्य, पूर्व मंत्री दिनेश आर्य, नरेंद्र अग्रवाल, सूर्यप्रताप आर्य, विवेक प्रेमी, बीरबल आर्य, कमला आर्य, अर्चना आर्य, पूनम आर्य, मृणाली आर्य, श्वेता आर्य, श्रुति आर्य आदि उपस्थित रहे।