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बढ़ती महंगाई में पूरा वेतन हो जाता है खर्च

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आम बजट में नहीं मिली कोई खास राहत
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शामली। डिग्री कॉलेज में पढ़ा रहे प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह को आम बजट रास नहीं आया। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई में इतना वेतन मिलने के बाद भी सब बराबर हो जाता है। वहीं, बजट में इस बार एक प्रतिशत शिक्षा उपकर बढ़ा दिया गया है।
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शहर के वीवी पीजी कॉलेज के प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह से आम बजट को लेकर बात की, तो उन्होंने बताया कि उन्हें प्रतिमाह करीब 65 हजार रुपये वेतन मिलता है। बढ़ती महंगाई में पूरा वेतन घर के खर्चों व अन्य खर्चों और टैक्स में बराबर हो जाता है। उनके परिवार में बच्चों सहित पांच सदस्य हैं, जिसमें दो बच्चों की पढ़ाई में करीब हर माह 10 से 12 हजार रुपये खर्च होते हैं। 10 हजार रुपये रसोई और घर के अन्य खर्चों में होते हैं। करीब पांच हजार बीमारी में खर्च होते रहते हैं। वहीं, साल में टैक्स के रूप में करीब 60 हजार रुपये कटते हैं। बच्चों की पॉलिसी में भी करीब दस हजार रुपये जमा होते हैं। वहीं, मकान बनाने में लिया ऋण अदा करने के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह किश्त कटती है। महीने के आखिर में पांच हजार रुपये शेष बचते हैं। इस बार बजट से इनकम टैक्स की सीमा में बढ़ोतरी होने की उम्मीद थी, लेकिन बजट में कोई बदलाव न होने से मायूसी ही हाथ लगी। ऊपर से शिक्षकों पर एक प्रतिशत शिक्षा उपकर और लगा दिया गया है। शिक्षकों को पहले स्टैंडर्स डिडेक्शन में डेढ़ लाख तक की टैक्स में छूट बढ़ाकर एक लाख 90 हजार तक की है। शिक्षकों पर आम बजट में कोई खास राहत नहीं हुई है।
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