चुनाव में धनबल और बाहुबल हावी
शामली। पांच साल पांच माह शामली नगरपालिका परिषद के चेयरमैन रहे बलवीर कांबोज के पुत्र रणधीर कांबोज का कहना है कि आजादी के बाद निकाय चुनाव का दौर बदला है। पहले सम्मान के लिए निकाय चुनाव लड़ा जाता था। अब धनबल, बाहुबल के आधार पर चुनाव लड़ा जाना लगा हैं। चुनाव में शराब का प्रचलन बढ़ गया है।
17 जुलाई 1966 से लेकर 29 मई 1971 तक शामली नगर पालिका परिषद के चेयरमैन रहे बलवीर कांबोज का परिवार सक्रिय राजनीति में है। वर्ष 1988 में शामली नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था, जो राजेश्वर बंसल से चुनाव हारकर तीसरे नंबर पहुंच गए थे। उनका भतीजा कंवरवीर कांबोज वर्ष 1988 में शामली नगर पालिका परिषद के वार्ड 19 से सदस्य रहे हैं। पूर्व चेयरमैन बलवीर सिह कांबोज के पुत्र रणधीर कांबोज वर्ष 1994 में वार्ड 19 से नगर पालिका परिषद के सदस्य रहे है। मौजूदा दौर में वह सक्रिय राजनीति में है। उनका कहना कि शामली नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद का आरक्षण पिछड़ी जाति में होता है, तो वह नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष का चुनाव लड़ते। उनका मानना है कि सदस्य पद का चुनाव ज्यादा खर्चीला हो गया है। चुनाव में लाखों रुपये खर्च बढ़ गया है। सदस्य पद का चुनाव सम्मान के लिए लड़ा जाता था, उस समय सदस्य चेयरमैन की अपेक्षा ज्यादा ताकतवर होता था, जो कि चेयरमैन के खिलाफ सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटवा देते थे। अब चुनाव का दौर बदला गया है। मौजूदा दौर में चेयरमैन मजबूत हो गया है और सदस्य कमजोर हैं। राजनीति पैसों की हो गई है। शराब का प्रचलन बढ़ गया है।