शामली। गौशाला रोड स्थित माता मंदिर सिद्धपीठ 125 साल पुराना है। मान्यता है कि बच्चों के चेचक होने पर यहां माथा टेकने व पूजा अर्चना करने पर ठीक हो जाती हैं। माता की पूजा करने से लिए साल में चैत्र व जेठ माह में मेला लगता है।
प्राचीन कालीन में मंदिर स्थल पर साधू संत धूनी लगाकर तपस्या करते थे। धारा गिरी, सोमगिरी, श्यामल गिरी बाबा की समाधि आज भी बनी हुई है। यहां बड़ी माता, मां काली, हनुुमान जी एवं शनि मंदिर मौजूद है। माता मंदिर का जीर्णोद्धार गत 19 फरवरी 1993 में लाला इंद्रसेन की पुण्यतिथि में लाला जयप्रकाश व उनके परिवार ने कराया था। शिव परिवार के मंदिरों का जीर्णोद्धार 26 फरवरी 2010 में शामली नगरपालिका के चेयरमैन अरविंद संगल द्वारा कराया। मंदिर समिति से जुड़े नीरज सिंघल व राजकुमार त्यागी ने बताया कि सिद्ध पीठ मंदिर होने से यहां मान्यता है कि बड़ी माता बच्चों के निकलने पर यहां माथा टेकने से चेचक माता तीन दिन में ठीक हो जाती है।
साल में दो बार चैत्र व जेठ में मेले का आयोजन होता है। जिसमें मां बड़ी माता की पूजा अर्चना करने के लिए महिला-पुरुष, बच्चे यहां आते है। घर परिवार की सुख समृद्धि एवं शांति के लिए मनोकामना मांगते हैं। मंदिर परिसर में शनि शिला, पीपल व शमी वृक्ष एक स्थान पर विराजमान है। शनिवार को विशेष पूजा अर्चना करने के लिए श्रद्धालु यहां आते है। यहां पंच मुखी हनुमान मंदिर विराजमान है।