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ना डाक्टर, ना दवाई, इलाज के दावे हवाई

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कैराना।
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कहने को यह अस्पताल है, पर इसमें न तो डाक्टर है और न मरीज के लिए दवाई। बिल्डिंग की भी हालत खस्ता होने को है। यहां महज एक फार्मेसिस्ट है, वहीं मरीज को देखता है और दवाई देता है।
21 जुलाई 2008 को दिवंगत हुकुम सिंह ने ऊंचागांव में प्राथमिक स्वास्थ्य समुदाय केंद्र का उद्घाटन किया था। अस्पताल कर्मचारियों के लिए आवास भी बनाए गए थे। इसमें इमरजेंसी रूम के साथ प्रसव कक्ष और ओटी भी है, लेकिन अस्पताल में पिछले 10 सालों में एक भी डाक्टर की स्थायी तैनाती नहीं हो सकी। जिस कारण करोड़ों की लागत से बना यह अस्पताल सफेद हाथी बनकर रह गया है। अस्पताल में फिलहाल एक फार्मेसिस्ट, एक वार्ड ब्वाय और एक स्वीपर की तैनात है।
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ओवरहैड़ टैंक हैं, पर टोटियों में पानी नहीं
अस्पताल परिसर में पानी के लिए बना ओवरहैड़ टैंक दिखावे का बनकर रह गया है। अस्पताल के स्वीपर प्रमोद ने बताया कि पानी की टंकी से अस्पताल में पाइप लाइन नहीं आने के कारण सफाई व अन्य काम के लिए पानी नल से भरना पड़ता है।

जगह-जगह अस्पताल में उगी घास
लापरवाही का आलम इस कदर है कि अस्पताल परिसर में जगह-जगह घास जमी हुई है। कर्मचारियों के क्वार्टरों की खिड़की के शीशे जगह-जगह से टूट चुके है तथा कई जगह से फर्श की भी हालत खराब हो चुकी है।

कागजों में डॉक्टर की ड्यूटी तीन दिन
अस्पताल में तीन दिन के लिए डॉ. मनीष राठी की ड्यूटी है, लेकिन कैराना में इमरजेंसी ड्यूटी के कारण वो काफी समय से नहीं आ रहे है। महिला स्टाफ नर्स के नहीं होने के कारण प्रसव भी कैराना सीएचसी पर कराना पड़ता है।

क्या बोले ग्रामीण
ग्रामीण उदल सिंह ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं है। परिवार में बीमार होने पर कैराना या शामली जाना पड़ता है। पंडित राम शरण ने बताया कि हमें तो दवा चाहिए। आंखों की दवाई लेने के लिए वह चार माह से अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनको आज तक दवाई नहीं मिली। वहीं, गांव अम्बेहटा से अस्पताल पहुंचे फुरकान ने बताया कि वो बच्चे की दवा लेने आए थे, लेकिन यहां तो केवल अस्पताल है दवा नहीं है। गांव के ही अंकित ने बताया कि 10 सालों से यहां डाक्टर आने का केवल इंतजार कर रहे है, लेकिन डॉक्टर नहीं आते।

20 हजार की आबादी, फिर भी लापरवाही
गांव की आबादी करीब साढ़े सात हजार है। इसके अलावा पड़ोसी गांव आल्दी, किशोरपुर, डुढार, बुच्चाखेड़ी सहित कुल आबादी करीब 20 हजार है। जिनके लोग इस अस्पताल पर निर्भर है। फिर भी अस्पताल के संबंध में लापरवाही बरती जा रही है।

कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। अधिकारियों को अस्पताल में मरम्मत कराने को कहा था केवल पुताई करा कर जिम्मेदारी पुरी कर ली गई।
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- गोविंद चौहान, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि

जिले में डॉक्टरों की कमी है। ऊंचागांव में डॉ. मनीष राठी की सप्ताह में तीन दिन ड्यूटी है। अगर वो कैराना में इमरजेंसी ड्यूटी के कारण वहां नहीं आ रहे हैं तो उनको निर्देश दिया जाएगा कि वे तीन दिन जरूर ऊंचागांव में पहुंचकर मरीजों को देखें। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ
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