कैराना के सियासी पदों पर हसन परिवार का हुआ कब्जा
शामली। कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव के परिणामों ने एक नया रिकार्ड कायम कर दिया है। अब कैराना की सियासत पर हसन परिवार का पूरी तरह से कब्जा हो गया है। इतिहास के आइने में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। पूर्व में यदि हसन परिवार का सदस्य सांसद चुना गया, तो विधायक की कुर्सी पर हुकुम सिंह विराजमान रहते आए थे। कैराना सांसद के निधन के बाद ही यहां लोकसभा उपचुनाव हुआ। चुनाव में रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन सांसद चुनीं गईं।
कैराना की सियासत हिंदू गुर्जरों की कलस्यान चौपाल और मुसलिम गुर्जरों के चबूतरे पर केंद्रित रहती आई है। कभी कलस्यान चौपाल की नुमाइंदगी करने वाले हुकुम सिंह विधायक रहे, तो कभी हसन परिवार का सदस्य सांसद चुना गया। करीब 30 साल से हुकुम और हसन परिवार का सदस्य ही कैराना की सियासी कुर्सी पर काबिज रहा। ऐसा पहली बार हुआ है, जब कैराना का सांसद, विधायक और कैराना नगर पालिका चेयरमैन हसन परिवार से ही हैं। मौजूदा स्थिति में कैराना की सांसद तबस्सुम हसन हैं, तो उनके बेटे नाहिद हसन विधायक हैं। वहीं, कैराना नगर पालिका चेयरमैन भी हसन परिवार से ही हाजी अनवर हसन हैं।
कैराना की सियासत
1984 से 1989 तक चौधरी अख्तर हसन सांसद रहे। वहीं, इसी दौरान 1980 और 1985 में हुकुम सिंह विधायक चुने गए। 1991 और 1993 में मुनव्वर हसन विधायक चुने गए थे। 1996 में मुनव्वर हसन कैराना सीट से सांसद चुने गए, तो हुकुम सिंह 1996 में विधायक रहे। फिर 2007 और 2012 में भी हुकुम सिंह विधायक चुने गए, तो 2009 के लोकसभा चुनाव में तबस्सुम हसन सांसद चुनी गईं।
2014 में कैराना लोकसभा सीट से हुकुम सिंह सांसद बने, तो कैराना विधानसभा सीट रिक्त होने पर उपचुनाव में 2014 में ही नाहिद हसन विधायक बने। फिर 2017 में भी नाहिद हसन विधायक बने। वहीं, 2017 में ही निकाय चुनाव में हाजी अनवर हसन कैराना नगरपालिका के चेयरमैन बने। अब 2018 के उपचुनाव में तबस्सुम हसन कैराना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई हैं।
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