...फूल गर सूख भी जाएं तो खुशबू देते हैं
कैराना (शामली)। प्रसिद्ध शायर आरिफ सैफी हैदराबादी तथा कोतवाली प्रभारी भगवत सिंह के सम्मान में शनिवार रात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। शायरों ने एक से बढ़कर एक शेर पढ़कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
कस्बे के एक स्कूल परिसर में शनिवार रात हुई शेरी नशिस्त की अध्यक्षता डॉक्टर निर्मल कुमार जैन ने की। शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रसिद्ध शायर अंसार सिद्दीकी और उस्मान उस्मानी सहित अन्य अतिथियों ने किया। इस दौरान प्रमुख शायर शमशेर आलम सैफी, कारी अलाउद्दीन जलालाबाद, जहीर अहमद जहीर, सैय्यद हाफिज फरीद, इदरीश कुरैशी ने कलाम पेश किए। शेरों पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। इस मौके पर कोतवाली प्रभारी भगवत सिंह को समाजसेवी शाहनवाज सिद्दीकी, आफाक सिद्दीकी ने तथा शायर आरिफ सैफी हैदराबादी को कौसर जैदी कैरानवी ने, नायब तहसीलदार कामेंद्र गुप्ता को पूर्व चेयरमैन राशिद अली ने स्मृति चिह्न एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान अंसार सिद्दीकी ने पढ़ा कि नासेह तुझे आते नहीं आदाब-ए-नसीहत, हर लफ्ज तेरा दिल में चुभन छोड़ रहा है। आरिफ सैफी हैदराबादी ने पढ़ा कि तुम बुजुर्गों को बडे़ प्यार से घर में रखना, फूल गर सूख भी जाएं तो महक देते हैं। कौसर जैदी कैरानवी ने पढ़ा- जारी है अभी तक भी जजाओं का सिलसिला, एक शेर कह दिया था कभी मां की शान में। मोहतरमा महक कैरानवी ने पढ़ा- लिल्लाह किसी शब तो ख्वाबों में चले आओ, आंखों का मेरी कब से फाकों पर गुजर है। उस्मान उस्मानी ने अपना कलाम कुछ इस अंदाज में पढ़ा - अयादत को भी वो आएंगे एक दिन, अभी कुछ और दिन बीमार रहियो। आसिफ अमान ने पढ़ा- कोई जीता ही नहीं मेरे लिए, ये भी एक किस्म का मर जाना है। जहीर राही मुरादाबादी ने पढ़ा - मुझसे परछाइयों का कद बड़ा कर दिया, धूप के रुख में मुझको खड़ा कर दिया। अकबर अंसारी ने पढ़ा - बिलखते भूख से बच्चों के सब्र की खातिर, किसी गरीब ने पानी उबाल रखा है। कासिफ अदीब देवबंदी ने पढ़ा- ये जो दौलत है मेरे पास भी आई थी मगर, तेरी तरह कभी तेवर नहीं बदला मैंने। शबाब ने पढ़ा- दुनिया की मोहब्बत में गिरफ्तार बहुत हैं,
घर-घर में अब तो जर के परस्तार बहुत हैं। इस अवसर पर राजेंद्र गोयल, अबरार सिद्दीकी, सलीम अंसारी, संजय सिंघल, अनिल गुप्ता, जरीफ चेयरमैन, चौधरी आलम, नौशाद, मुजफ्फर अली, फरमान सिद्दीकी, पीरजी अयाज, डाक्टर रईस और तनवीर कुरैशी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।