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प्रेम जिंदगी का महामंत्र, बैर छोड़कर सभी प्रेम करे

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अमर उजाला ब्यूरो
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झिंझाना। जैन संत श्रेयांश मुनि महाराज ने कहा कि प्रेम जिंदगी का महामंत्र है। बैर छोड़कर सभी सेेे प्रेम करना चाहिए। प्रेम के द्वारा दुश्मन को भी अपना बनाकर जीता जा सकता है।
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सोमवार को कस्बे के जैन स्थानक में प्रसिद्ध जैन संत श्रेयांश और शुभम मुनि महाराज के पहुंचने पर जैन समाज की ओर भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर जैन संत श्रेयांश मुनि महाराज ने कहा कि प्रेम जिंदगी का महामंत्र है। शामली से चलकर झिंझाना स्थानक में पहुंचे जैन संत श्रेयांश महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रेम एक ऐसा शब्द है। जिससे मनुष्य ही नही बल्कि जानवरों को भी वश में किया जा सकता है। प्रेम भी तीन प्रकार का होता है। एक जिसमें प्रार्थना होती है। दूसरा प्रेम मीरा ने भगवान श्रीकृष्ण से किया। जो निष्छल भाव से भरा था। एक प्रेम वासना से भरा होता है, जो इंसान को पाप के अंधकार में ले जाता है। इसलिए प्रेम निश्छल भाव से या प्रार्थना भाव से करना चाहिए, तभी इंसान को मुक्ति का मार्ग मिल सकता है। इसलिए प्रेम को जीवन में मुक्ति का महामंत्र कहा गया है। अपने जीवन में अगर कुछ पाना है तो। गुरू व भगवान से प्रेम करो, मांगो मत सब कुछ अपने आप मिलेगा। दुश्मन से प्रेम करोगे तो वह भी तुम्हारा बन सकता है। मौके पर मास्टर राजपाल सिंह, मुकेश जैन, राकेश जैन, अनिल जैन, सुरेश गर्ग, प्रीतम सिंह, अनिल संगल, चंद्रपाल, अंकुर मित्तल, संजीव गोयल, सौरभ, गौरव, विनोद, संदीप, अमन कुमार, मन्नू, बल्लू जैन, हिमानी जैन, नीतिजैन, इंदु, सीमा, नितिन, सोनिया, शालू, कमलेश, बंटी, अरुणा जैन आदि उपस्थित रही है। मंगलवार को प्रवचन सुबह आठ बजे से नौ बजे तक चलेगा।
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