शामली। जनपद के किसी भी मॉडल स्कूल में अभी तक फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। बच्चों का जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करनी पड़ रही है। अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त नहीं हो पाई है। स्कूलों के बाहर मॉडल स्कूलों के बोर्ड तो लगवा दिए गए है, लेकिन अंदर से सब ऐसा ही चल रहा है। यह स्थिति तब है जब सत्र अप्रैल माह में ही शुरू हो गया था।
शासन के निर्देश पर प्रत्येक जनपद के हर ब्लाक और नगर से पांच-पांच प्राथमिक स्कूलों का चयन मॉडल स्कूलों में किया गया है। शामली जनपद में भी पांच ब्लाक में 40 प्राथमिक स्कूलों का चयन हुआ है। सरकार ने सत्र शुरू होने से पूर्व ही सभी स्कूलों में फर्नीचर, शौचालयों में टाइल्स, सफेद बोर्ड, रंगाई पुताई का कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए थे। मगर, स्थिति आज भी सरकारी विद्यालयों के जैसी ही है। अप्रैल माह से शुरू हुए सत्र को तीन महीने हो गए है। अभी तक किसी भी स्कूल में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो पाई है। बच्चें जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई कर रहे है। कई स्कूलों में अभी तक रंगाई पुताई का कार्य भी नहीं कराया गया। शौचालयों की स्थिति खराब है और टाइल्स भी नहीं लगवाई गई है। स्कूलों में सफेद बोर्ड भी नहीं पहुंचे है। ऐसे में जनपद के सरकारी मॉडल स्कूल प्राइवेट स्कूलों की बराबरी कैसे कर सकेंगे। अधिकारियों और ठेकेदारों की लेटलतीफी के कारण शासन की मंशाओं पर पानी फिर रहा है। यह स्थिति तब है जब अप्रैल माह में ही टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई थी। दो जुलाई से सभी स्कूल खुल गए है।
जल्द ही क्रय आदेश जारी किया जाएगा। सभी मॉडल स्कूलों में जल्द से जल्द फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। - गीता वर्मा, बेसिक शिक्षा अधिकारी शामली।