चौसाना। यमुना में अधिक पानी आने से फसलें बर्बाद होने के बाद मुआवजे के नाम पर किसानों के साथ मजाक किया जा रहा है। वर्ष 2025 में फसलें बर्बाद होने के साथ-साथ जमीन कटान से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद राहत के नाम पर अधिकतर किसानों को मात्र 500 रुपये का मामूली मुआवजा देकर खानापूर्ति कर दी गई, जबकि बड़ी संख्या में किसान इससे भी वंचित रह गए।
भड़ी मुस्तफाबाद के शकील को वर्ष 2025 में 15 बीघा उड़द की फसल बर्बाद होने पर सिर्फ 500 रुपये का मुआवजा मिला। उनका कहना है कि अधिक पानी आने से पूरी फसल खराब हो गई थी, लेकिन राहत के नाम पर 500 रुपये देना किसानों के साथ मजाक करना है। किसान रविंद्र कुमार निवासी नाई नगला ने बताया कि सर्वे के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई है। नाई नगला के किसान विक्रम सिंह और धीरज कादयान को सिर्फ 600 रुपये की मदद मिली।
इसी तरह भड़ी मुस्तफाबाद के नाजिम राणा और इस्फाक ने बताया कि पुराने नुकसान की भरपाई नहीं हुई और नए नुकसान का भी कोई ठोस मुआवजा नहीं मिला। किसानों का कहना है कि यह पूरी तरह अन्याय है और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने मांग की है कि नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और सभी प्रभावित किसानों को उनका उचित हक दिलाया जाए।