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बुराइयों को दूर कर शिक्षा की तरफ बढ़े- अकीलुर्रहमान

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जलालाबाद (शामली)। मदरसा मिफ्ता उल उलूम में खत्म बुखारी शरीफ का आयोजन किया गया। इस मौके पर 171 तलबाओं को मौलवियत, मुफ्ती और हाफिज की उपाधि देकर दस्तारबंदी की गई। लोगों ने मुल्क की तरक्की और शांति के लिए दुआ मांगी।
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कार्यक्रम की शुरुआत कारी इनाम अहमद ने तिलावत-ए कुरान से की। मदरसा के शेखुल हदीस मौलाना अकीलुर्रहमान ने हदीस की आखिरी किताब बुखारी का आखिरी दर्स सबक दिया। मदरसा मिफ्ताउल उलूम के 114 तलबाओं को मौलवियत, 15 तलबाओं को हाफिज, 42 तलबाओं को मुफ्ती की उपाधि देकर दस्तारबंदी की गई। इनमें मणिपुर से 10, बिहार से पांच, उड़ीसा से नौ, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र से दो-दो तलबा सहित विभिन्न प्रदेशों के 171 तलबाओं की दस्तारबंदी की गई। इस दौरान मौलाना अकीलुर्रहमान ने समाज में फैल रही बुराइयों को दूर करने पर जोर दिया। मदरसा मोहतमीम मौलाना हफीउल्लाह खां ने कहा कि इंसान को अपनी जिंदगी में रोजा, नमाज, सदका, खैरात खूब करनी चाहिए। मदरसा का तराना अब्दुल रहमान देहलवी और अब्दुल वाहिद कटकी ने पेश किया। नात ए नबी मौलाना सालिम ने पेश की। इस मौके पर मौलाना रफीउज्जमा, मौलाना रईस अहमद, मुफ्ती निजामुद्दीन आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में मदरसा मोहतमीम मौलाना हफीउल्ला खां शेरवानी ने मुल्क की तरक्की और शांति के लिए दुआ कराई। अध्यक्षता मौलाना हफीउल्लाह खां ने और संचालन मौलाना शोएब मिफ्ताही ने किया। इस मौके पर मुंशी नईम, मौलवी रिजवान, मौलाना याकूब, मौलाना सारिक, मोलवी वाजिद, अन्नूमियां, मुंशी मोहम्मद अहमद, मोहम्मद ताहिर, फैजखां शेरवानी, जीशान काजमी, कारी तैय्यब, कारी निशात, सैयद वजाहत, नजीलुर्रहमान, मोहसिन खां, नबीलुर्रहमान, इरफान माली आदि शामिल रहे।
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