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15 अगस्त के बाद गन्ने की फसल में यूरिया का प्रयोग न करे किसान

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शामली। कोयंबटूूर गन्ना अनुसंधान केंद्र के निदेशक एवं गन्ना वैज्ञानिक डॉक्टर बक्शीराम ने कहा कि किसानों को 15 अगस्त के बाद गन्ने की फसल में यूरिया का छिड़काव नही करना चाहिए। गन्ने की फसल के लिए लाभ दायक नहीं है। गन्ने की 0238 के साथ- साथ गन्ने की 0118 प्रजाति भी अच्छी है। किसान इस प्रजाति का गन्ने की बुआई करके अच्छी लागत पा सकते है।
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बृहस्पतिवार को कोयंबटूूर गन्ना अनुसंधान केंद्र के निदेशक एवं गन्ना वैज्ञानिक डॉक्टर बक्शीराम सरशादी लाल ग्रुप की अपर दोआब चीनी मिल के बुलावे पर यहां आए हैं। ग्राम गोहरनी, भैंसवाल, टपराना व कंडेला गांव में आयोजित गोष्ठी में उन्होंने सीओ 0238 व सीओ 0118, सीओ जी 2014 गन्ने की प्रजाति के संबंध में किसानों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि तीनों प्रजाति किसानों के लिए फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद किसानों को गन्ने की फसल में यूरिया का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यूरिया गन्ने की बढ़वार को रोकता है। उन्होंने कहा कि गन्ने की फसल में यूरिया का प्रयोग बुआई के समय एक तिहाई व गन्ना बुआई के चार पांच माह के बाद एक तिहाई का प्रयोग होना चाहिए। इस मौके पर शामली चीनी मिल के यूनिट हेड आरबी खोखर, ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक उपेंद्र कुमार, गन्ना महाप्रबंधक कुलदीप, पिलानिया, अतिरिक्त गन्ना महाप्रबंधक नरेेश कुमार, उपमहाप्रबंधक केपी एस सरोहा, ज्येष्ठ प्रबंधक दीपक कुमार, अनिल कुमार, किसान वेद सिंह गोहरनी, भीष्म सिंह, विनय कुमार, संदीप कुमार, अनिल कुुमार, मकसूद, संजीव कुमार, आशुतोष कुमार, कृपाल सिंह, विक्की, जगमेहर सिंह, अरविंद, महेंद्र, कृष्णपाल, ब्रजपाल, रामफल, जोगेंद्र, प्रेम, संजू रियासत, सुधीर आदि मौजूद रहे। उपमहाप्रबंधक केपी एस सरोहा ने गोष्ठी का संचालन किया।
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