शामली। बेमौसम बूंदाबांदी और तेज हवाएं किसानों के लिए आफत बनी हुई। सोमवार से लेकर बुधवार तक रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी-तेज हवाएं चलने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बन गई है। इससे गेहूं और दलहनी फसलों को भारी नुकसान हुआ हैं।
रविवार की मध्य रात्रि के बाद मौसम में बदलाव शुरू हो गया। तीन दिनों से रुक-रुक हो रही बूंदाबांदी और नौ किलोमीटर प्रति घंटा हवाएं चलने से मौसम ठंडा हो गया। बुधवार की सुबह तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी होने से जिले भर में खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसलों में पानी भर जाने जरूर नुकसान पहुंचा है। पूरा दिन बादलों की आंखमिचौली चलती रही। इससेे अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि 40 प्रतिशत आर्द्रता रही। मौसम विभाग के अनुसार लोकल डिस्टर्बेंस के चलते मौसम में जरूर बदलाव आया हैं। बृहस्पतिवार को आकाश में हलके बादल छाए रहेंगे। उसके बाद मौसम सामान्य हो जाएगा। पूर्वी यमुना नहर खंड के जिलेदार अंबुज कुमार के अनुसार पिछले तीन दिनों में 13 एमएम बूंदाबांदी रिकार्ड की गई है। उप कृषि निदेशक रामवीर कटारा ने बताया कि बूंदाबांदी से खेत में पानी भरने से कटे हुए गेहूं को नुकसान होगा। गेहूं की बाली काली पड़ जाएगी।
गेेहूं, मंसूर, चना एवं आम की की फसल को नुकसान
बघरा कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डाक्टर पीके सिंह ने बताया कि गेहूं की कटाई में अभी दस दिन शेष है। बूंदाबांदी और तेज हवाएं चलने से गेेेहूं की दस प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है। गेहूं कटाई के दौरान गिर गया है। वह सूखने के बाद काला पड़ जाएगा। उसमें फंगस लग जाने के बाद क्वालिटी में गिरावट आएगी। सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के मृदा विभाग के अध्यक्ष डाक्टर अशोक कुमार अहलुवालिया ने बताया कि बूंदाबांदी और तेज हवाओं से दलहनी फसल और आम का बोर को नुकसान पहुंचा हैं। गेहूं की फसल गिर जाने से जरूर नुकसान हुआ है।