वीवीपीजी कॉलेज में अंबेडकर पर चल रही दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हो गया। वक्ताओं ने अंबेडकर के जीवन से संबंधित सभी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को उनके पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया। छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर लोगों का दिल जीत लिया।
वर्तमान परिवेश में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के चिंतन की प्रासंगिकता विषयक पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति एचएस सिंह ने अंबेडकर के सभी पहलुओं के बारे में बताते हुए सभी का ध्यान आकृष्ट किया। संगोष्ठी दो सत्रों में आयोजित हुई। डॉक्टर अलका ने अंबेडकर के जीवन के बारे में बताया। डाक्टर कुलदीप ने आंकड़ों के द्वारा अस्पृश्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मनुष्य जन्म से मृत्यु तक अपनी जाति को समाप्त नहीं कर सकता। डॉक्टर हरेंद्र मलिक ने कहा कि हमें संविधान में अधिकारों की मांग करते हुए अपने कर्तव्यों को जिम्मेदारी से निर्वाह करना चाहिए। डॉक्टर पंकज ने कहा कि अंबेडकर ने स्वयं संविधान का संरक्षक बनकर शिक्षित व संगठित होकर समाज को अपने स्थान प्राप्त करने के लिए जागरूक बनाया। वहीं, विभिन्न कॉलेजों से आए प्राध्यापकों ने कार्यक्रम में सहभागिता कर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक पंकज मलिक, सेवानिवृत्त राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डाक्टर अर्चना शर्मा, नवनीत जैन, दीपक जैन, प्राचार्य वेदकुमारी, संयोजक डॉक्टर प्रताप कुमार, नवनीत जैन, सचिव दीपक जैन, प्रोफेसर दिनेश आदि का स्वागत किया गया। संचालन डाक्टर मंजू मगन ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस दौरान डाक्टर भूपेंद्र, छवि, बबली, अनुप्रिता, गुंजन, संगीता सक्सेना, दीपक, डाक्टर वंदना, डाक्टर अरविंद, अनिता जैन, करणा गुप्ता, डाक्टर मोनिका, डाक्टर मृदुला आदि मौजूद रहे।