शामली। तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर महाराज का 57 वां दीक्षा दिवस नगर में भक्तिभावपूर्वक मनाया गया। इसके साथ ही महाराज के गुणों की अर्चना करते हुए उनकी भक्तगणों द्वारा आराधना की गई।
बुधवार को नगर में सन्मति सागर महाराज का 57 वां दीक्षा दिवस बड़े ही भक्तिभाव के साथ मनाया गया। सभी भक्तों ने उनके गुणों की अर्चना करते हुए आराधना की। चित्र अनावरण का सौभाग्य बड़ौत नगरी से पधारे अभय कुमार जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्वलन अक्षय कुमार जैन ने किया। मुनि श्री सुयरा सागर महाराज ने तपस्वी सम्राट की गौरव गाथा सुनाते हुए उनके जीवन की घटनाओं का उल्लेख किया। इस अवसर पर आचार्य सुंदर सागर महाराज ने अपनी मंगल वाणी में कहा कि यूपी में अयोध्या वह पावन धरा है, जिस पर अनंतानंत तीर्थकार अवतरित हुए। वहीं, एटा जिले में एक फफोतू नामक गांव है। जिसमें पदमवती पुरवाल जाति में तीन हीरे उत्पन्न हुए। उनमें से प्रथम रत्न आचार्य महावीर कीर्ति रहे, जो अठारह भाषाओं के ज्ञाता रहे। वह तीन से छह घंटे तक शीर्षासन से साधना किया करते थे। कड़ी ठंड में छत पर बैठकर आत्मा की साधना किया करते थे। आचार्य विमल सागर महाराज निमिन्त ज्ञान शिरोमणि थे। तीसरे रत्न तपस्वी सम्राट सन्मति सागर महाराज रहे। उनका जन्म फफोतू गांव में हुआ। सोलह वर्ष की आयु में उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर लिया था। दीक्षा के दिन से ही दूध को छोड़कर शेष पांच रसों का त्याग कर दिया। वहीं सन 1974 से 36 वर्ष तक अन्न का दाना भी नहीं छुआ। चतुर्मास में पहले महीने में एक आहार एक उपवास , दूसरे महीने में एक आहार दो उपवास, तीसरे माह में तीन उपवास एक आहार, चौथे माह में चार उपवास एक आहार इस प्रकार कठिन साधना की। उन्होंने 120 दिनों में केवल 20 दिन आहार किया। वहीं दशलक्षण में दस दिन और अष्टानिका महापर्व में आठ दिन निर्जला उपवास करके साधु की आत्मनिष्ठा को सिद्ध किया। उन्होंने बताया कि आज के दिन ही विमल सागर ने संमेद शिखर में कार्तिक शुक्ल बारस को दीक्षा धारण कर अहिंसा का पाठ पढाया। सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। इस दौरान जेके जैन, मोहित जैन, आलोक जैन आदि मौजूद रहे।