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Shamli News: वित्तीय वर्ष के 13 दिन शेष, कई परियोजनाओं का काम अधूरा

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शामली। 31 मार्च को चालू वित्तीय वर्ष खत्म होने जा रहा है, लेकिन जिले की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधूरी हैं। इस कारण इनका लोकार्पण अधर में लटका है। अमृत भारत योजना में शामिल शामली रेलवे स्टेशन का सुंदरीकरण अधूरा है। मेरठ- करनाल हाईवे पर रेलवे फाटक पर उपरिगामी पुल की परियोजना का शुभारंभ नही हो पाया है।
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दो साल से अमृत भारत योजना में शामली रेलवे स्टेशन शामिल है। 25 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि से शामली रेलवे स्टेशन का सुंदरीकरण, प्लेटफार्म नंबर एक से लेकर दो तक आने जाने के लिए उपरिगामी पुल, प्लेट फार्माें की लंबाई बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। रेलपार बाईपास किनारे स्टेशन की मुख्य चारदीवारी, दो प्रवेश द्वार और दो पार्किग का निर्माण चल रहा है। स्टेशन पर प्लेट फार्म एक से लेकर दो तक पुल का सवारियों के उतरने चढ़ने के लिए जीना और लिफ्ट बनाने के साथ प्लेटफार्म दो का सुंदरीकरण, यात्री टीन शेड का कार्य अधूरा है।
रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार और दोनों पार्किंग की साज सज्जा कार्य अधूरा है। सभी का तीस प्रतिशत कार्य बाकी है। बताया गया है कि पहले सात मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई दिल्ली से आनलाइन लोकार्पण किया जाना प्रस्तावित था, किंतु कार्य अधूरा होने से प्रधानमंत्री का लोकार्पण कार्यक्रम टल गया है।ऑनलाइन लोकार्पण करेंगे। उत्तर रेलवे के निर्माण खंड के सेक्शन इंजीनियर अंकित मलिक का कहना है कि अगले छह माह में शामली रेलवे स्टेशन का सुंदरीकरण कार्य पूरा होगा।
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शिलान्यास के बाद शुरु नहीं हुआ पुल का काम
शामली के मेरठ- करनाल हाईवे के 89 रेलवे फाटक पर उत्तर प्रदेश और रेलवे की मदद से दो लेन का उपरिगामी पुल उत्तर रेलवे की ओर से स्वीकृत किया गया था। 26 फरवरी को प्रधानमंत्री दो लेन के उपरिगामी पुल का नई दिल्ली से ऑनलाइन शिलान्यास कर चुके है। एक साल बाद भी उत्तर रेलवे के दिल्ली के बडौदा हाऊस की ओर से से उपरिगामी पुल का निर्माण शुरु नही हुआ है। उत्तर प्रदेश सेतु निगम सहारनपुर के अधिशासी अभियंता सतेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि दिल्ली बडौदा हाऊस के आरओबी के प्रोजेक्ट मैनेजर रजत कुमार चोपड़ा को कार्य सौंपा गया है। उनके द्वारा कार्य शुरु नहीं किया गया है।

कलक्ट्रेट भवन पूरा करने के लिए 5.50 करोड़ की दरकार
शामली। पूर्वी यमुना नहर के किनारे नवीन कलक्ट्रेट का निर्माण कार्य पिछले दस साल से चल रहा है। दो साल में यह परियोजना पूरी करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन बजट के अभाव के चलते परियोजना अधूरी है। 28 करोड़ रुपये की लागत से नवीन कलक्ट्रेट का ढांचा खड़ा हो चुका है। अधूरे कलक्ट्रेट कार्यालय निर्माण पूरा करने के लिए दो साल से साढ़े पांच करोड़ रुपये की धनराशि शासन से मांगी गई है। शासन से धनराशि अवमुक्त कराने के लिए वित्तीय स्वीकृति का अनुमोदन हो चुका है। धनराशि के अभाव में शामली कलक्ट्रेट कार्यालय भवन का निर्माण अधूरा है। राजकीय निर्माण निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मेनेजर संतोष कुमार पांडे ने बताया कि 31 मार्च से पहले धनराशि अवमुक्त होने की संभावना है।
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