बेटी और बाप का रिश्ता बड़ा पवित्र : विजय कौशल
शामली। संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने जनकपुर में सीता स्वयंवर, परशुराम संवाद, सीता विवाह तथा बेटी की विदाई का मर्मस्पर्शी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बेटी और बाप का रिश्ता बड़ा पवित्र होता है
मंगलवार को कैराना रोड जेजे फार्म में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि राम-लक्ष्मण विश्वामित्र के लिए पुष्प चयन के लिए जनकपुर की पुष्प वाटिका में प्रवेश करते हैं। उधर, इसी समय जानकी जी भी अपनी सखियों के साथ गौरी पूजन के लिए आती हैं। जानकी भक्ति का प्रतीक है और भक्ति को भगवान से मिलने के लिए बाग में आना पड़ता है। भक्ति से पहले भगवान बाग में पहुंच गए। महाराज श्री ने कहा कि यदि भक्त की श्रद्धा सच्ची है तो भगवान उससे पहले पहुंचकर भक्त की प्रतीक्षा करते हैं। जानकी जी बाग में प्रवेश करती है, सरोवर में स्नान करती है और गौरी पूजन करती है। भगवत प्राप्ति के लिए ये तीन साधन है। सत्संग ही बाग है, भगवान को पाने के लिए सबसे पहले सत्संग में जाना पड़ता है। भगवान की प्राप्ति के लिए अहंकार को त्याग कर समर्पण और दीनता का सहारा लेना पड़ता है। विजय कौशल जी ने कहा कि पूरी रामकथा ही सेतुबंध है जो दो परिवारों, दो राज्यों तथा दो संस्कृतियों को जोड़ती है। राम का नाम ही देश को एक रख सकता है। जनकपुर में बारात पहुंचती है और धूमधाम से राम का विवाह सीता के साथ, भरत का विवाह मांडवी के साथ, लक्ष्मण का विवाह उर्मिला के साथ और शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति के साथ सम्पन्न होता है। संत विजय कौशल जी महाराज ने बेटी की विदाई का बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया। उन्होंने कहा कि बेटी दो कुलों की मर्यादा की रक्षा करती है। बेटा केवल एक कुल की रक्षा करता है। बेटी की विदाई बड़ी ही कारुणिक होती है। जनक जैसा परम बैरागी विदेह भी बेटी की विदाई पर फूट-फूटकर रो रहा है। वह बाप जो जवान बेटे की मौत पर एक आंसू तक नहीं गिराता, बेटी की विदाई पर बेजार होकर रोता है। बेटी और बाप का रिश्ता बड़ा पवित्र होता है। इस अवसर पर राजेश्वर बंसल, अखिल बंसल, राजीव गोयल, रोबिन गर्ग, सपन मित्तल, महेश धीमान, मुकेश, ओमप्रकाश, विजय, प्रदीप गर्ग आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।