स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनपद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में शौचालय तो बनवा दिए गए, लेकिन उनमें ताले डाल दिए गए हैं। कुछ स्कूलों के शौचालय ठप पड़े हैं, इन्हें दुरुस्त कराने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को खुले शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जनपद के पांच ब्लाक में करीब 750 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय है। जिनमें 72,236 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। स्कूलों में शौचालयों का निर्माण बड़े पैमाने पर कराया गया, लेकिन पानी की व्यवस्था का ध्यान नहीं रखा गया। खासकर देहात क्षेत्र के स्कूलों में यह हालत है कि वहां शौचालयों पर ताला डाल दिया गया है, कुछ शौचालयों के दरवाजे ही गायब हैं, या क्षतिग्रस्त हैं।
अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को स्कूलों में शौचालयों की स्थिति देखी, तो जलालाबाद क्षेत्र के गांव चंदेनामाल स्थित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक स्कूल, गांव लांक और बनत स्थित बीएसए कार्यालय के बराबर में उच्च प्राथमिक स्कूल के शौचालय पर ताला लगा मिला। कुछ स्थानों पर तीन से चार शौचालय होने के बाद भी केवल एक ही शौचालय को खोलकर रखा गया। बाकी पर ताला बंद रखा जाता है।
शहर के प्राथमिक विद्यालय नंबर तीन, नौ में नहीं है शौचालय
शहर के मोहल्ला आजाद चौक स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर तीन और नौ में शौचालय नहीं है। इन दोनों स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है। इस कारण छात्र-छात्राएं और शिक्षक घर से ही बोतल में पानी लेकर आते हैं। शौचालय न होने के कारण बच्चों को शौच के लिए घर की ओर दौड़ना पड़ता है।