चार महीने, 200 से ज्यादा आवेदन, नहीं खुले 149 खाते
शामली। केंद्र और प्रदेश सरकार चाहती है महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए, लेकिन बैंक अधिकारी इसमें अड़ंगा लगा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के बचत खाते तक खोलने में मनमानी की जा रही है। आलम यह है कि चार महीना पूर्व आवेदन किए जाने के बावजूद खाते नहीं खोले गए हैं। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और निर्धारित समय में खाता खोलने का निर्देश दिए।
बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में बैंक अधिकारियों के साथ जिला स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। उसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों के बचत खाते खुलने को लेकर चर्चा हुई। मालूम चला कि अधिकांश बैंक शाखाओं में महिला स्वयं सहायता समूहों को बचत खाता खोलने में टरकाया जा रहा है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के प्रबंधक दलगंजन सिंह ने बताया कि जनवरी और फरवरी माह में 200 से ज्यादा आवेदन खाता खुलवाने के लिए स्वयं सहायता समूहों की तरफ से विभिन्न बैंकों में आवेदन किए गए थे, उनमें से अब तक 149 खाते नहीं खुल पाए हैं। सर्वाधिक 67 आवेदन पंजाब नेशनल बैंक की शाखाओं में लंबित हैं, जिनमें गंगेरू शाखा में 44, डूंडूखेडा शाखा में 13 और गढ़ीपुख्ता, चौसाना व पिंडौरा शाखा में 10 आवेदन लंबित हैं। इसके अलावा सर्व यूपी ग्रामीण बैंक शाखा जसाला में 26 आवेदन लंबित हैं, तो भारतीय स्टेट बैंक की कांधला क्षेत्र की शाखाओं में 31 आवेदन लंबित हैं। इसी तरह यूको बैंक में 14 आवेदन लंबित हैं। यह भी पता चला है कि बैंक अधिकारियों द्वारा स्वयं सहायता समूहों की सभी महिलाओं को खाते खोलने की प्रक्रिया के लिए बैंक शाखा में बुलाया जाता है, जबकि नियमानुसार समूह की अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष को ही बुलाया जाना चाहिए। उधर, बैंक अधिकारी बार बार यही तर्क देते हैं कि सर्वर ठीक नहीं है या स्टाफ की कमी है। उधर, जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने बैंक अधिकारियों से कहा कि स्वयं सहायता समूहों के बचत खाते खोलने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए। यदि खाते खोलने में आनाकानी की जाएगी, तो संबंधित बैंक शाखा के अधिकारियों के खिलाफ उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई कराई जाएगी।