स्कूलों में अ, आ पढ़ाने के साथ अब शिक्षक बच्चों को मलेरिया, फाइलेरिया और वायरल बुखार से बचाव का भी पाठ भी पढ़ाएंगे। इसके लिए प्रार्थना सत्र को चुना गया है। बुखार से निपटने के लिए मलेरिया विभाग द्वारा पहली बार यह कदम उठाया जा रहा है, ताकि छात्र टोली बीमारियों को खत्म करने के लिए संजीवनी का काम करें। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के बीएसए और डीआईओएस को पत्र लिखा है।
दरअसल, शामली जिले में हर साल बुखार से कई मौतें हो जाती हैं। मरने वालों में बुजुर्ग और बच्चों की संख्या ज्यादा होती है। हर साल स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीमारियों से निपटने के खूब प्रयास किए जाते हैं, लेकिन जुलाई, अगस्त, सितंबर में बीमारियां चरम पर होती हैं। इस बार स्वास्थ्य विभाग ने माना है कि बीमारी का सबसे बढ़िया इलाज है, जागरूकता। डाक्टरों के अनुसार ज्यादातर बीमारियां लापरवाही से होती हैं। समय रहते इन बीमारियों को जांच लिया जाए और पीड़ित को उपचार मुहैया करा दिया जाए तो जान बच सकती है। इसलिए शासन के आदेश पर इस बार स्वास्थ्य विभाग ने अबकी बार बीमारियों से निपटने के लिए प्लान तैयार किया है, ताकि बीमारियों को बढ़ने से रोका जाए तथा बीमारी की पहचान कर समय पर उसका इलाज किया जाए।
ये है स्वास्थ्य विभाग का प्लान
शिक्षा का पाठ पढ़ाने से पूर्व बच्चों को इस बार बीमारियों से बचाव का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के आदेशानुसार इस बार कक्षा एक से 12 तक के स्कूलों में छात्र-छात्राओं को प्रार्थना सत्र में जागरूक किया जाएगा। उनको वायरल, मलेरिया, फाइलेरिया, टायफायड सहित अन्य बीमारियों के बारे में बताया जाएगा। बीमारी से बचाव के तरीके, लक्षण के बारे में शिक्षक बताएंगे। समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी स्कूलों में जाकर बच्चों को बीमारियों के प्रति जागरूक करेंगे। यदि कोई बच्चा कई दिनों से अनुपस्थित है तो इसके बारे में भी स्कूल प्रबंधन को स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देनी होगी।
बढ़ने लगी है अस्पतालों में मरीजों की संख्या
जुलाई का महीना शुरू होने के साथ ही बीमारियों भी बढ़ने लगी हैं। जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। गांवों में कई जगह दवाइयों का वितरण भी किया गया और कई गांवों में फीवर ट्रीटमेंट डीपो भी खोले गए, लेकिन दिन पर दिन बुखार से पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है।
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कक्षा एक से 12 तक के बच्चों को बीमारियों के प्रति जागरूक करने तथा उनसे निपटने के लिए स्कूल के प्रार्थना सत्र के दौरान ही शिक्षकों द्वारा उनको बताया जाएगा, इसके बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखा गया है। शिक्षकों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरुक किया जाएगा।