सरस साहित्य समिति की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में सरहद पर रक्षा करने वाले जवानों और देश में तंगहाल अन्नदाता की हालत पर काव्य पाठ ने श्रोताओं को झकझोर दिया।
रविवार शाम नगरपालिका परिषद शामली के सभागार में सरस साहित्य समिति की ओर से हास्य व्यंग्य के पुरोधा कवि प्रदीप शर्मा की स्मृति में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि चेयरमैन अरविंद संगल ने कहा कि देश का साहित्य जितना समृद्ध होगा, वह देश उतना अक्षुण और संपन्न होगा। अध्यक्षता कर रहे सूर्यवीर सिंह ने कवि सम्मेलनों को समय की मांग बताया। शुभारंभ मां सरस्वती और हास्य व्यंग के कवि प्रदीप शर्मा के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके किया गया। इसके बाद ओजस्वी कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने रचना पाठ करते हुए कहा कि सुबह को उठके सूर्य को जो जल चढ़ा रहे, जो कमसिनों पर धर्म की गर्मी दिखा रहे, इंसान होके इंसा से जो प्यार न करे, वो मंदिरों में घंटियां टनाटन बजा रहे।
कवि योगेंद्र सुंदरियाल ने कहा छोटी सी इस बात को समझा देना राम, मंदिर के निर्माण को मिस्त्री है इस्लाम। उधर, सौम्य गीतकार सुनील अरोरा टम्मी ने कहा कि कल्लू की किस्मत कोरी थी, खुद काला पत्नी गोरी थी। बड़ौत से आए कवि अजय तोमर ने देशभक्ति और किसानों की दशा पर अपनी कविता प्रस्तुत की। कहा कि सरहद पर अब जवानों की नहीं परवाह कुछ इनको, गरीबों नौजवानों की नहीं परवाह कुछ इनको, पसीने से सींची फसलें खुद ही बर्बाद करते हैं, देश के किसानों की अब नहीं परवाह कुछ इनको।
कवि अनिल धीमान पोपट कामचोर ने हास्य व्यंग्य की चुटकियों से श्रोत्राओं को लोट पोट कर दिया। वहीं, शाहदरा से आए गजेंद्र कौशिक गजानन ने कहा आधुनिक युग का नेता कितना महान हो गया, राजनीति पढ़ी नहीं राजनीति का विद्वान हो गया। इसके अलावा युवा गीतकार देवेंद्र शर्मा ने पढ़ा रातो की तन्हाई में किसको पुकारेंगे, दीवारों से करके बातें फिर गुजारेंगे। कवि सम्मेलन में रामपाल सिंह देश प्रेमी, राजीव भावज्ञ, श्रीकांत, अमन कुमार , शिवम रंगीला, सरदार मंजीत सिंह ने कविता पाठ किया। इस मौके पर डॉ. विपिन कौशिक, आदेश शर्मा, अरविंद ऐरन, हिमांशु वर्मा, ध्रुव गुप्ता, समीर खान अनुभव, डॉ. राकेश कौशिक, विनोद बंसल, मनोज मित्तल मौजूद रहे। इस दौरान अजय तोमर बड़ौत, योगेंद्र सुंदरियाल दिल्ली, गजेंद्र गजानन शाहदरा को साहित्य भूषण व प्रीतम सिंह प्रीतम को सम्मानित किया गया।