संस्कार और संवेदना में गहरा रिश्ता होता है। ऐसे रिश्ते निभाना अगर बचपन से ही सिखा दिया जाए या सीख लिया जाए तो मुमकिन है कि हर चेहरे पर खुशी देखने को मिलती रहे। समाज में एक-दूसरे का दुख-दर्द समझना और बांटना ही तो मानवता है। इसका पाठ कुछ छात्र-छात्राओं ने घंटाघर के समक्ष कैंप लगाकर लोगों को सुनाया तो अनजाने लोगों के बीच भी रिश्तों की डोर मजबूत होती चली गई। कुछ ही देर में नेपाल के भूकंप पीड़ितों के लिए 26600 रुपये की धनराशि भी इकट्ठी हो गई।
सेवाभाव का जज्बा लिए तक्षशिला पब्लिक स्कूल के पासआउट कुछ विद्यार्थियों ने नेपाल में भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद करने का निर्णय लिया और सेवा नामक संस्था तैयार कर ली। इसी संस्था के बैनर तले बृहस्पतिवार को लगभग एक दर्जन छात्र-छात्राओं ने घंटाघर के समक्ष कैंप लगा दिया और आमलोगों को रोककर उनसे भूकंप पीड़ितों की मदद करने का आग्रह किया। बच्चों की भावनाओं की कद्र करते हुए लोगों ने दिल खोलकर इमदाद दी।
बच्चे उस समय खुशी से उछल पड़े जब उन्होंने दानपात्र खोलकर देखा। गिनती की तो 26600 रुपये से अधिक राहत राशि उनके प्रयासों से भूकंप पीड़ितों के लिए एकत्र हो चुकी थी। इस अभियान में सिद्धांत, सौम्या, साकेत, तन्मय, रिया, अक्षिता, नमन, बलप्रीत, ऋषि, हर्ष, गजल, फराज, शांतनु, प्रभजोत, हर्षित आदि शामिल रहे।