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विश्व हृदय दिवस :: जीवनरक्षक तकनीक से मरीजों का उपचार

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मेडिकल कॉलेज का ह्रदय रोग कक्ष। संवाद
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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में हृदय रोगियों के उपचार के लिए पिछले एक साल में सुविधाओं का विस्तार किया गया है। मरीजों की बेहतर देखभाल और समय से उपचार के लिए हृदय रोग विशेषज्ञों की निगरानी में जांच और इलाज की व्यवस्था की गई है। हार्ट अटैक की स्थिति में मरीजों की जान बचाने के लिए थ्रॉम्बोलाइसिस जैसी जीवनरक्षक तकनीक से तत्काल उपचार किया जा रहा है।
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29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में आने वाले हृदय रोगियों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केसी वर्मा और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शान की देखरेख में मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
अस्पताल में ईसीजी और ईको की सुविधा उपलब्ध है। हृदय की धड़कन और उसकी कार्यप्रणाली की जांच के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक की स्थिति में मरीज को तत्काल थ्रॉम्बोलाइसिस दिया जाता है। इसमें दिल की धमनियों में बने रक्त के थक्के को दवा की मदद से घोलने का प्रयास किया जाता है, जिससे रक्त प्रवाह बहाल करने में मदद मिलती है।
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हर 30 से 45 मिनट में कुर्सी छोड़कर चलें

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केसी वर्मा ने बताया कि रोजाना 20 से 30 मरीजों का इलाज किया जाता है। लगातार लंबे समय तक बैठे रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शारीरिक गतिविधि कम होने से मोटापा, ब्लड प्रेशर, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ता है।
उन्होंने सलाह दी कि हर 30 से 45 मिनट में कुर्सी से उठकर दो से तीन मिनट तक टहलें। संभव हो तो लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। कुर्सी पर बैठे-बैठे पैरों को स्ट्रेच करने के साथ गर्दन और कंधों की हल्की एक्सरसाइज भी करें। उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में हृदय रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

मेडिकल कॉलेज का ह्रदय रोग कक्ष। संवाद

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