प्रदेश सरकार द्वारा प्लाईवुड और विनियर फैक्ट्री के लाइसेंस पर नवीनीकरण शुल्क 15 हजार के बजाय 75 हजार रुपये करने के विरोध में प्लाईवुड और विनियर निर्माता सुप्रीम कोर्ट की शरण लेंगे। प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन पश्चिमी जिलों की शहर के एक होटल मेें हुई बैठक में इस मुद्दे पर सरकार के उपेक्षात्मक रवैये की निंदा करके इसी आशय का निर्णय किया गया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्लाईवुड और विनियर फैक्ट्रियों पर प्रति यूनिट 75 हजार रुपये नवीनीकरण शुल्क थोपे जाने के विरोध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई करके हाईकोर्ट ने प्लाईवुड विनियर और आरा मशीनों को एक समान मानते हुए मात्र 15 हजार रुपये प्रति यूनिट की दर से नवीनीकरण शुल्क लगाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर एसोसिएशन की प्रांतीय इकाई ने सरकार से जमा अतिरिक्त शुल्क वापस करने की मांग की, लेकिन प्रदेश सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की।
उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर से हाईकोर्ट के आदेश पर प्लाईवुड विनियर फैक्ट्री मालिकों की उपेक्षा किए जाने पर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई, लेकिन इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार लगातार विरोध कर रही है। तय किया गया कि प्रदेश के सभी प्लाईवुड निर्माता न्याय पाने के लिए एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे। प्रदेश स्तर पर यह संदेश प्रचारित करने के लिए एक कमेटी भी बनाई गई।
याचिका प्रचार समिति में बरेली से वीरेंद्र प्रकाश अग्रवाल, रामपुर से राजपाल सिंह, लखीमपुर खीरी से रमेश अग्रवाल व गोपाल अग्रवाल, लखनऊ से अशोक अग्रवाल और सीतापुर से रामपति शामिल किए गए। बैठक में गाजियाबाद से आए विजय कथूरिया, नजीबाबाद बिजनौर से अमरीक सिंह, देवेंद्र अग्रवाल व मो. याकूब, रामपुर से मुन्नन खां, बरेली से आए आईडी अरोरा, गुरप्रीत सिंह, रविकांत आदि ने सुझाव दिए।