शाहजहांपुर। चित्रा टाकीज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास डाॅ. दामोदर दीक्षित ने कहा कि जहां भक्ति होती है, वहां भगवान पहुंच जाते हैं। इससे पूर्व कर्दम ऋषि की कथा सुनाई। बताया कि उनको नौ पुत्रियां नवधा भक्ति के रूप में प्राप्त हुईं।
कपिल मुनि से उनकी माता ने सांख्य शास्त्र का उपदेश सुना कि संसार के साथी और सामान में सुख या दुख नहीं होता, अपितु इंद्रियों के सापेक्ष होता है। आत्मा से उसका कोई संबंध नहीं है। सुनाया कि जो वस्तु मिलती है, वह थोड़े दिन के लिए मिलती है, फिर छूट जाती है। यह आंखों पर परदा आसक्ति के कारण पड़ गया है।
संत कृपा से निर्मल बुद्धि प्राप्त होती है, तब सत्यता का आभास होता है। उन्होंने संतों के लक्षण बताए। इसके पश्चात ध्रुव के चरित्र का वर्णन किया। इसी प्रकार प्रियव्रत की कथा के माध्यम से बताया कि ब्रह्मा जी ने कहा कि निवृत्ति मार्ग पर जाने से पूर्व गृहस्थ आश्रम में जाओ, क्योंकि काम, क्रोध, मोह आदि पर विजय इसी आश्रम में प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम का श्री गणेश रमेश त्रिपाठी एवं प्रसून त्रिपाठी और रामबली ने हनुमान चालीसा का पाठ एवं भजन के माध्यम से प्रभु की स्तुति कर किया। रामदुलारे त्रिगुनायत ने अयोध्या कांड की कथा में राम केवट संवाद को सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। संचालक आचार्य रामानंद दीक्षित ने भक्ति मुक्ति रूपी सीता को खोजने की विधि का वर्णन किया। मुख्य यजमान कमलेश कुमार खन्ना ने व्यास एवं अन्य विद्वानों का माल्यार्पण कर स्वागत, पूजन किया। चंद्रशेखर खन्ना, रागिनी खन्ना, सरला खन्ना, ओम खन्ना, डाॅ. राम मेहरोत्रा, सोमनाथ कपूर एवं सरिता कपूर, ध्रुवनारायन मेहरा, सुधा मेहरा आदि अनेक भक्तों का सहयोग रहा।
चित्रा टॉकीज में आयोजित श्रीमदभागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास ने कथा सुनाई। स्रोत: आयोजक