रेलवे में चालक, सहचालक और शंटरों का टोटा है, जिसके चलते कार्यरत चालक तनावग्रस्त हैं। उनको समय से अवकाश नहीं मिलता और लगातार काम करते-करते उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन उच्चाधिकारी उनकी व्यथा सुनकर उसका निस्तारण नहीं कर रहे। बता दें कि रोजा जंक्शन प्वांइट है। यहां से सीतापुर, गोंडा होते हुये बिहार और बंगाल तक के लिए कई एक्सप्रेस गाड़ियों और माल भाड़े की कई गाड़ियों का संचालन किया जाता है। रेल संचालन ठीक रखने के लिये यहां 22 ड्राइवर मेल, 44 ड्राइवर पैसेंजर और 141 ड्राइवर मालगाड़ी के पद स्वीकृत हैं। इसके अलावा 11 पद शंटर और 203 पद सहायक चालकों के स्वीकृत हैं। वर्तमान में 19 मेल चालक, पैसेंजर के 34 चालक और मालगाड़ी के 70 चालक ही नियुक्त हैं, जबकि शंटर के पद पर मात्र सात और सहचालकों मेें मात्र 148 कर्मियो को ही नियुक्त किया गया है।
इतनी बड़े परिमाण में पद खाली रहने से काम करने वाले अन्य चालकों पर काम का बोझ बढ़ गया है। हाल ही में रिटायर हुये चालक मेल रामानुज मिश्रा बताते हैं कि सरकार मेल गाड़ियों ओर मालगाड़ियों की संख्या बढ़ा रही है। माल भाड़े के लिए व्यापारियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, लेकिन रेलकर्मियो की संख्या नहीं बढ़ायी जा रही है, जिससे हमारे चालक गहरे अवसाद में तनावग्रस्त होकर रेल का संचालन कर रहे है। कई चालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रेल अधिकारी कर्मियों का शोषण कर रहे हैं एवं उनसे अंडर रेस्ट व बिना गार्डों के ट्रेनें चलवाकर संरक्षा नियमों की भी अनदेखी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि मेमो ट्रेन का संचालन मोटरमैन द्वारा कराया जाना चाहिये और वह भी सिर्फ छह घंटों तक, लेकिन संरक्षा नियमों की अनदेखी कर पैसेंजर चालक आठ से दस घंटे तक अकेले रेल मेमो का संचालन कराकर संरक्षा नियमों का मखौल उड़ा रहे हैं। हद तो यह है कि इन दिनों लखनऊ से मुरादाबाद जाने वाली अधिकांश मालगाड़ियों का संचालन बिना गार्डों के हो रहा है। कहने के तो यहां गार्डों के 84 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती मात्र 70 की है। ऐसे में रेल के चालक सहचालक और गार्डों के स्वास्थ्य पर अब प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है। हालत यह है कि रेलवे अस्पताल में हर दिन 10 से पंद्रह चालक और गार्ड अस्पताल मे बीमार होकर आ रहे, लेकिन उनको सिक पर नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में यहां के रेलकर्मी तनावग्रस्त होकर रेल संचालन कर रहे हैं, जिससे किसी दिन कोई हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
रेलवे में चालकों व सह चालकों, गार्डों के पद खाली हैं, जिसके लिये रेलवे बोर्ड से मंजूरी लेनी पड़ती है। कुछ रिटायर हो गए हैं। नई भर्ती नहीं हो रही हैं। ऐसे में कठिनाइयां तो आ रही हैं फि र भी संरक्षा नियमों के तहत रेल संचालन कराया जा रहा है।
-डीके शुक्ला, कार्यवाहक लोको प्रभारी, रोजा