फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रसेम गांव में बुखार का प्रकोप, बीस दिन में तीन की मौत, कई बीमार

विज्ञापन
बुखार से पीड़ित आरती अवस्थी। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
विज्ञापन
शाहजहांपुर/कांट। वायरल बुखार ने अब गांवों में पैर पसार लिए हैं। कई गांव में तमाम लोग बीमार पड़े हैं, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं उन तक नहीं पहुंच पा रही हैं। झोलाछाप के इलाज से तबीयत ठीक होने की बजाय बिगड़ती जा रही है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां झोलाछाप से इलाज करा रहे बुखार के रोगी असमय काल के गाल में समा गए। कांट क्षेत्र के रसेम गांव में पिछले बीस दिन में एक परिवार के दो लोगों की और एक महिला की भी मौत बुखार से हुई है। कई अन्य ग्रामीण बुखार से ग्रस्त हैं।
विज्ञापन

रसेम निवासी अनिल (44) दिव्यांग हैं। अनिल ने बताया कि 17 अगस्त को उनके 15 वर्षीय बेटे कालिका प्रसाद को बुखार आया था। पेट में दर्द उठा और इलाज के लिए जलालाबाद ले जाते समय रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। अनिल ने बताया कि तीन सितंबर को उसकी बेटी आराध्य (पांच) को बुखार आने के बाद पेट में दर्द हुआ। अस्पताल ले जाते समय उसकी भी मौत हो गई। गांव के ही सूरजपाल (52) की पत्नी उसमा देवी की मौत तीन सितंबर की रात हो गई थी।
उसमा देवी को दो दिन से तेज बुखार आ रहा था। झोलाछाप से दवा ली थी। पेट में तेज दर्द होने के बाद उनकी मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। मजदूरी करके घर का खर्चा चलता है। सूरज के बड़े भाई मदनलाल (65) को भी बुखार आ रहा है। कांट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी अंशुमान तिवारी ने बताया कि उन्होंने कल ही ज्वाइनिंग की है। ग्रामीणों के बुखारग्रस्त होने की जैसे ही सूचना मिली, तुरंत टीम भेज दी। गांव में दवा वितरण के साथ ही टीकाकरण भी कराया जाएगा।
विज्ञापन

विधायक पुत्र ने किया फोन तब पहुंची स्वास्थ्य टीम
रसेम गांव में बुखार फैलने की सूचना पर ददरौल से भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह के बेटे अरविंद सिंह गांव में पहुंचे। उन्हें ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कई लोग बुखार से जूझ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य टीम का कहीं पता नहीं। गांव में 20 दिन में तीन लोगों की मौत बुखार से हो चुकी है। इस पर अरविंद सिंह ने सीएचसी प्रभारी को फोन कर कैंप लगाने के लिए कहा। इसके बाद सीएचसी से पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाकर लोगों को दवा बांटी।
मेरा बेटा अनिल दिव्यांग है। पूरा परिवार झोंपड़ी में रहता है। बेटे को न पेंशन मिल रही है और न ही आवास मिल सका है। हम खुद इस उम्र में मजदूरी करके अपने बेटे व बेटे के परिवार का भरण पोषण करते हैं। पोता-पोती बीमार हुए मगर स्वास्थ्य विभाग से कोई देखने नहीं आया।
कुसुमलता
पिछले एक महीने से मुझे बुखार आ रहा है। शाहजहांपुर के एक डॉक्टर से दवा भी ली लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। गांव के झोलाछाप से भी दवाई ली थी। अभी तक आशा या स्वास्थ्य विभाग से कोई गांव में हालचाल लेने नहीं आया है।
आरती अवस्थी
पिछले सात दिनों से तेज बुखार आ रहा है। हमारे गांव की लगभग आधी आबादी बीमार है। विधायक के पुत्र को फोन से सूचना दी तो वे आए और सीएचसी में जानकारी दी तब जाकर कैंप लगा। टीम भी बगैर जांच किए पैरासीटामॉल दवा दे रही है।
संतोष पाठक
पिछले पांच दिनों से बुखार आ रहा है। दवाई खा रहे हैं, लेकिन कोई लाभ नहीं हो रहा है। गांव में स्वास्थ्य टीम नहीं आई थी। अब जाकर कैंप लगाया है। मेरे बेटे रंजीत को भी बुखार आ रहा है।
श्यामपाल
पिछले दस दिन से बुखार आ रहा है। रसेम गांव में बहुत से ग्रामीण बुखार से तप रहे हैं लेकिन कई लोगों के पास इलाज कराने की आर्थिक क्षमता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग भी ध्यान नहीं दे रहा है।
कमलेश
जबसे प्रधान बने हैं, गांव की सफाई व्यवस्था बेहतर की है। अगर ग्रामीण सफाई कर्मचारी की कोई शिकायत करते हैं तो उसे देखा जाएगा। ग्रामीणों की मदद में हर समय हाजिर हैं।
तरुण सिंह, ग्राम प्रधान
गांव में बुखार फैलने की सूचना मिली थी। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर और फोन कर सूचना दे दी है। प्रशासन को ग्रामीणों का इलाज कराना चाहिए।
विज्ञापन

नीरज मिश्र, पूर्व जिला पंचायत सदस्य
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें