जलालाबाद (शाहजहांपुर)। खंडहर क्षेत्र के गांव बलदेवपुर और हथिनापुर को भूमि कटान से बचाने के लिए दोनों गांवों के बीच करीब तीन माह पूर्व मिट्टी से बनाया गया कच्चा तटबंध रामगंगा नदी के तेज बहाव से रविवार की रात टूट गया। तटबंध टूटने से खेतों के अलावा बलदेवपुर और हथिनापुर समेत शाहपुर गांव भी चारों तरफ पानी से घिर गया।
खंडहर-टापर मार्ग से बलदेवपुर होकर हथिनापुर, शेरपुर चुरघुटी, तेरा, मड़ैया गुजरान, हवा मड़ैया आदि गांवों तक जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी का बहाव शुरू हो गया। इस रास्ते पर अलग-अलग तीन जगह पानी बहने से इन सभी गांवों का सीधा संपर्क टूट गया है। गांवों के खेतों में धान, उर्द, बाजरा आदि फसलें डूब गई हैं और खेतों में दो से तीन फुट पानी भरा हुआ है।
एसडीएम मधुसूदन गुप्ता और तहसीलदार राघवेशमणि त्रिपाठी टीम के साथ बल्देवपुर गांव पहुंचे। कटान रोकने के लिए बलदेवपुर से करीब 700 मीटर दक्षिण दिशा में बह रही रामगंगा के किनारे मिट्टी का 120 मीटर लंबा तटबंध बनाया गया था। गांव वालों ने अधिकारियों को बताया कि नदी के तेज बहाव से तटबंध से दो दिन से रिसाव हो रहा था। पानी ज्यादा होने से तटबंध की मरम्मत नहीं हो सकी और रविवार की रात करीब दस बजे वह टूट गया।
ग्रामीणों की बात
खेतों में पानी भर जाने से फसलों के नुकसान की आशंका है। कई घरों के दरवाजे तक पानी पहुंच गया है।-
सत्यवीर, हथिनापुर, जलालाबाद
तटबंध में रेत या मिट्टी भरी बोरियां नहीं लगाई गईं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर पानी घरों में आ जाएगा।-
राजपाल, बलदेवपुर, जलालाबाद
फसलों का नुकसान होने के अलावा जानवरों के बांधने से लेकर उनके चारे तक की समस्या हो गई है।-
बबलू, मडैया गुजरान, जलालाबाद
मंडी समिति सहित तीन जगह बनाए जा रहे बाढ़ शरणालय
जलालाबाद में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने तीन स्थानों पर जर्मन हैंगर तकनीक से शरणालय बनाने का काम तेज करा दिया है। मंडी समिति और कोला गांव में शरणालय स्थलों का निर्माण अंतिम चरण में हैं। तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि एक शरणालय जल्द ही खंडहर क्षेत्र में भी बनाया जाएगा।
बल्देवपुर गांव तक पानी पहुंचने से रोकने के लिए रामगंगा से होने वाले कटान वाले स्थान पर डलवाई गई मिट्टी से पानी का रिसाव होने लगा। उसे दुरुस्त करने का काम भी शुरू कराया गया, लेकिन पानी बढ़ जाने से मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो सका। रिपोर्ट डीएम सहित सिंचाई विभाग को भेजी जा रही है। प्रभावित गांवों के लोगों के लिए दो नाव भी उपलब्ध करा दी गई हैं।-
मधुसूदन गुप्ता, एसडीएम जलालाबाद
गंगा-रामगंगा के बढ़ते जलस्तर से तमाम गांव बाढ़ से घिरकर बने टापू
मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा और रामगंगा में रविवार रात हुई तेज बारिश के बाद उफान तेज हो गया है। नतीजे में दोनों नदियों के इर्द-गिर्द बसे करीब एक दर्जन गांव चौतरफा पानी से घिरकर टापू बन गए हैं। सोमवार को जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे पर चौरा गांव से लेकर करीब 150 आगे तक दो फुट पानी आने के बाद हाईवे की पुलिया से होकर कस्बे तक पहुंच गया है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक सोमवार शाम पांच बजे तक गंगा का जलस्तर तीन सेमी और रामगंगा का दो सेमी बढ़ गया। अब गंगा खतरे के निशान से 22 सेमी नीचे रह गई, जबकि रामगंगा 21 सेमी ऊपर पहुंच गई है। रामगंगा का पानी बदायूं-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे के किनारे बनी नर्सरी वाली पुलिया से होते हुए कस्बे के दक्षिणी भाग में फैल रहा है। तहसीलदार अजहर अंसारी ने बताया कि नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।
गर्रा नदी से कई गांवों में शुरू हुआ भूमि कटान
तिलहर इलाके में गर्रा नदी के करीब बसे बरहा मोहब्बतपुर, चितीबोझी,आजमाबाद, बिहारीपुर, जिकड़ीपुर, रटा-रटी आदि गांवों के आसपास भरा पानी सोमवार को कुछ कम हुआ, लेकिन इन गांवों के आसपास भूमि कटान बढ़ गया है। एसडीएम आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग की टीमें मिट्टी से भरी बोरियां लगवा रही हैं।
जिन स्थानों पर कटान की आशंका अधिक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य कराया जा रहा है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोरों को भी तैनात किया गया है। वहीं, खुदागंज में गर्रा नदी का जलस्तर सोमवार शाम कुछ कम होने के बावजूद सैकड़ों बीघा खेतों में पानी भरा हुआ है। फसलें खराब होने से चिंतित किसान किसानों को पशुओं के लिए चारा भी नहीं मिल रहा है।